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भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट स्पेस के लिए ‘कैब’ बनाने को तैयार, जमीन से जुड़े इस अंतरिक्ष के सफर के बारे में जानें


स्पेस स्टार्टअप्स में भारत दुनिया के दिग्गज देशों से बराबरी का मुकाबला कर रहा है। उसी क्रम में भारत का उभरता हुआ स्पेस स्टार्टअप्स ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ अपने स्पेशल बिजनेस मॉडल और महत्वाकांक्षी योजनाओं के जरिए अंतरिक्ष सेक्टर में धूम मचाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी के को-फाउंडर पवन कुमार चंदना का कहना है कि उनका लक्ष्य बड़ी स्पेस कंपनियों से सीधे मुकाबला करना नहीं है, बल्कि स्पेस मार्केट के उस हिस्से पर फोकस करना है, जिस पर किसी की नजर नहीं पड़ी है।
चंदना एक ऐसी मिसाल देते हैं जो सचमुच जमीन से जुड़ी है। वे कहते हैं, ‘स्पेसएक्स को एक ट्रांसकॉन्टिनेंटल ट्रेन या A380 की तरह सोचें। हमारा मकसद वह कैब या बिजनेस जेट बनना है जो आपको हमारे छोटे रॉकेट्स के साथ स्पेस में एक खास ऑर्बिट में एक खास स्लॉट पर उतारे।’ उनका कहना है कि बड़ी स्पेस कंपनियां एक साथ कई ग्राहकों के सैटेलाइट को एक ही ऑर्बिट में लॉन्च करती हैं, जबकि स्काईरूट का फोकस डेडिकेटेड लॉन्च यानी किसी खास ग्राहक की जरूरत को पूरा करने पर है।
पहली कोशिश में सफल रहा स्काईरूट – स्काईरूट ने इस दिशा में पहला अहम कदम नवंबर 2022 में उठाया था, जब कंपनी ने अपने सब-ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-एस को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह मिशन पहली ही कोशिश में सफल रहा, जो किसी भी निजी स्पेस कंपनी के लिए बड़ी सफलता माना जाता है। इस सफलता ने भारत के निजी स्पेस सेक्टर को नई पहचान दिलाई।
300 किलोग्राम का भार उठाने में सक्षम है रॉकेट – अब कंपनी अपने पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 के लॉन्च की तैयारी में जुटी है। करीब 75 फीट ऊंचा यह रॉकेट लगभग 300 किलोग्राम तक का पेलोड लो अर्थ ऑर्बिट में ले जाने में सक्षम होगा। हालांकि शुरुआती मिशन में पेलोड इसकी क्षमता से कम रहने की संभावना है। रॉकेट के तीनों सॉलिड प्रोपेलेंट स्टेज, कलाम-1200, कलाम-250 और कलाम-125 पहले ही लॉन्च साइट पर पहुंच चुके हैं, जबकि बाकी इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर सिस्टम हैदराबाद में अंतिम परीक्षण से गुजर रहे हैं।
विक्रम-1 में क्या है खास? – विक्रम-1 के ऊपरी हिस्से में ऑर्बिट एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाया गया है, जिसमें 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन ‘रमन-2’ लगा है। अंतिम इंटीग्रेशन पूरा होने के बाद इन्हें ट्रकों के जरिए लॉन्च साइट तक भेजा जाएगा।
इस मिशन का लॉन्च तीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से किया जाएगा, हालांकि लॉन्च की तारीख का ऐलान आधिकारिक स्लॉट मिलने के बाद ही होगा।
कंपनी अब तक करीब 100 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है और रिपोर्ट्स के मुताबिक अगली फंडिंग राउंड में यह भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न बन सकती है।
स्काईरूट ने हैदराबाद में अपना ‘इनफिनिटी कैंपस’ भी तैयार किया है, जहां से भविष्य में हर महीने एक विक्रम-क्लास रॉकेट लॉन्च करने की क्षमता विकसित करने की योजना है।