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अमेरिका-इजरायल का डर नहीं, श्रीलंका ने दी ईरानी जहाज को शरण, दिसानायके के फैसले की दुनियाभर में तारीफ


श्रीलंका की सरकार ने हिंद महासागर में अमेरिकी हमले का शिकार बनने से पहले ईरानी जहाज को अपनी शरण में ले लिया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने कहा है कि उनकी सरकार ने एक दूसरे ईरानी जहाज को अपने एक पोर्ट पर डॉक करने और उसके क्रू को देश में आने की इजाजत दे दी है। ये एक दिलेर फैसला है। ईरान के एक जहाज को बुधवार को अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से हमला कर डूबो दिया था। इस हमले में 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने टेलीविजन पर बोलते हुए कहा कि ईरान के दूसरे नेवी जहाज IRINS बुशहर ने श्रीलंका सरकार से पूछा था कि क्या वह देश के किसी पोर्ट पर डॉक कर सकता है। श्रीलंका के अधिकारियों ने जहाज पर मौजूद 208 लोगों, जिनमें 53 ऑफिसर, 84 कैडेट ऑफिसर, 48 सीनियर सेलर्स, 23 सेलर्स को राजधानी कोलंबो में आने देने की इजाजत दे दी। इसके अलावा जहाज को दुनिया के सबसे व्यस्त कमर्शियल पोर्ट में से एक कोलंबो के बजाय ईस्ट कोस्ट पर त्रिंकोमाली में कस्टडी में लेने का फैसला किया गया।
अमेरिकी नाराजगी को श्रीलंका ने किया नजरअंदाज – श्रीलंका ने ईरानी जहाज को अपने बंदरगाह पर शरण देकर और नाविकों को शरण देकर निश्चित तौर पर अमेरिका की नाराजगी मोल ली है। श्रीलंका का कहना है कि वो मानवीय आधार पर ऐसा कर रहा है। इसके अलावा श्रीलंका की नौसेना समुद्र से तबाह हुए जंगी जहाज का मलबा इकट्ठा कर रही है, घायल नाविकों का इलाज कर रही है और लड़ाई से तेल की कीमतें बढ़ने पर होने वाले आर्थिक नुकसान के लिए भी तैयार है।
श्रीलंका और ईरान के बीच मजबूत राजनीतिक और आर्थिक रिश्ते हैं। श्रीलंका ने ईरान से $250 मिलियन के कच्चे तेल के शिपमेंट खरीदे थे। इससे पहले कि उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर मिडिल ईस्ट के देश पर बैन लग गए। दोनों पक्ष “तेल के बदले चाय” बार्टर डील पर सहमत हुए, जिससे श्रीलंका ईरान को चाय की महीने की किश्तों में पेमेंट कर सकता है, जो ईरान को होने वाला एक बड़ा एक्सपोर्ट है।