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प्रेग्नेंसी में सिर्फ मिसकैरेज ही नहीं, इन 9 वजहों से भी होती है ब्लीडिंग, जानें ट्राइमेस्टरवाइज कारण


प्रेग्नेंसी के हर ट्राइमेस्टर में ब्लीडिंग के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। पहली तिमाही में रक्तस्राव की वजह इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग, मिसकैरेज या एक्टोपिक प्रेग्नेंसी जैसी स्थितियां हो सकती हैं। वहीं, आखिरी तिमाही में प्लेसेंटा प्रीविया और प्रीटर्म लेबर भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं।
गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग होने पर महिलाएं अक्सर घबरा जाती हैं और उन्हें मिसकैरेज का डर सताने लगता है। हालांकि,मायो क्‍लीन‍िक के अनुसार, पहली तिमाही में मिसकैरेज के अलावा, मोलर प्रेग्नेंसी, सर्वाइकल इंफेक्शन और अन्य कारणों से भी ब्लीडिंग हो सकती है। दूसरी तिमाही में इसका कारण प्लेसेंटा एक्रेटा या कमजोर सर्विक्स हो सकता है।
हर बार गंभीर कारण से नहीं होती है गर्भावास्‍था में ब्‍लीड‍िंग – प्रेग्नेंसी में वेजाइना से होने वाली ब्लीडिंग के कुछ कारण गंभीर हो सकते हैं, लेकिन कई बार यह गंभीर नहीं होते। आइए, नीचे ट्राइमेस्टर के अनुसार देखें कि प्रेग्नेंसी की पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में किन कारणों से रक्तस्राव हो सकता है।
1.एक्टोपिक प्रेगनेंसी: जब फर्टिलाइज्‍ड एग गर्भाशय के भीतर इम्प्लांट होने की बजाय उसके बाहर, जैसे कि कहीं फैलोपियन ट्यूब में, ठहरकर विकसित होने लगता है।
2.इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग: कंसेप्‍शन के लगभग 10 से 14 दिन बाद, जब फर्टिलाइज्‍ड एग गर्भाशय (यूट्रस) की परत में जाकर स्थापित होता है, तो हल्की स्पॉटिंग या ब्लीडिंग हो सकती है। इसी को इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग कहा जाता है।
3.म‍िसकैर‍िज: 20वें सप्ताह से पहले गर्भपात की स्थिति में भी रक्तस्राव हो सकता है।
4.मोलर प्रेग्‍नेंसी: बहुत ही दुर्लभ मामलों में फर्ट‍िलाइज्‍ड अंडाणु भ्रूण में विकसित होने की बजाय असामान्य ऊतक में बदलने लगता है।
5.गर्भाशय ग्रीवा या प्राइवेट पार्ट की समस्याएं: सर्वाइकल इंफेक्शन, सर्विक्स में सूजन या पॉलिप्स जैसी गांठें इसकी वजह हो सकती हैं। इसके अलावा प्राइवेट पार्ट में घाव, मस्से या अन्य असामान्य गांठें भी रक्तस्राव का कारण बन सकती हैं।
सेकेंड और थर्ड ट्राईमेस्‍टर में होने वाले ब्‍लीड‍िंग के कुछ आम कारण – 6.कमजोर सर्व‍िक्‍स: कमजोर सर्विक्स (जिसे सर्वाइकल इनसफिशिएंसी कहा जाता है) वह स्थिति होती है, जिसमें गर्भाशय ग्रीवा समय से पहले खुलने लगती है। इससे समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ सकता है।7.प्लेसेंटल एब्रप्शन: यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से समय से पहले अलग हो जाता है। प्लेसेंटा ही गर्भस्थ शिशु को पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।
8.प्लेसेंटा एक्रेटा: यह तब होता है, जब प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार में असामान्य रूप से बहुत गहराई तक बढ़ जाती है।
9.प्लेसेंटा प्रीविया: यह वह स्थिति है, जब प्लेसेंटा गर्भाशय ग्रीवा को ढक लेता है। इससे गर्भावस्था के दौरान अक्सर गंभीर रक्तस्राव हो सकता है।
10.प्रीटर्म लेबर- समय से पहले ड‍िलीवरी शुरू होने पर भी हल्की ब्‍लीड‍िंग हो सकता है।
प्रेग्‍नेंसी के अंतिम दिनों में हल्की ब्‍लीड‍िंग- यह स्राव अक्सर म्यूकस के साथ आता है और लेबर की शुरुआत का संकेत हो सकता है। प्राइवेट पार्ट से निकलने वाला यह डिस्चार्ज गुलाबी या हल्का खून मिला हुआ हो सकता है, जिसे रक्तस्राव कहा जाता है।
हर हाल में डॉक्‍टर से संपर्क करना जरूरी है – क्लीवलैंड क्लीनिकके लेख में बताया गया है कि प्रेग्नेंसी के दौरान हल्का रक्तस्राव आम हो सकता है, खासकर पहली तिमाही में। साथ ही, ब्लीडिंग के कई कारण हो सकते हैं, और इसका मतलब यह नहीं कि हमेशा कुछ गड़बड़ है या आपको तुरंत घबराना चाहिए। हालांकि, कभी-कभी यह किसी गंभीर समस्या का भी संकेत हो सकता है।
इसलिए, अगर प्राइवेट पार्ट से ब्‍ल्‍ड आए, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करना सबसे सुरक्षित उपाय है। डॉक्टर ही तय कर सकते हैं कि ब्लीडिंग सामान्य है या आगे जांच की जरूरत है। इसी बीच, शांत रहने की कोशिश करें। ज्यादातर महिलाओं की गर्भावस्था ब्लीडिंग के बावजूद पूरी तरह स्वस्थ रहती है और वे स्वस्थ बच्चों को जन्म देती हैं।