
अमेरिका-ईरान के बीच जंग थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस बीच, खबर आई है कि ईरान ने दुनिया के 20 फीसदी कच्चे तेल की आवाजाही वाले गलियारे होर्मुज स्ट्रेट के पास बारूदी सुरंगे बिछा दी हैं। हालांकि, अमेरिका की नौसेना ने कहा है कि उसने इन बारूदी सुरंगों को नष्ट कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट से ही भारत का करीब 50 फीसदी तेल गुजरता है। भारत के जहाजी टैंकरों को होर्मुज से आने-जाने की छूट ईरान ने दी है। वहीं, अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की 30 दिन की मोहलत दी है। मगर, युद्ध लंबा खिंचा तो तेल का संकट बड़ी टेंशन दे सकता है।
इस बीच, द हिंदू की एक खबर के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने G-7 देशों से अपने ऑयल रिजर्व को चरणबद्ध तरीके से खोलने को कहा है। IEA में 30 देश ऐसे हैं, जिन्हें 90 दिनों का ऑयल रिजर्व रखना जरूरी होता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि भारत के पास इमरजेंसी में कितना तेल रिजर्व है। साथ ही यह भी जानेंगे कि भारत के पड़ोसी चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के पास कितने दिन का ऑयल रिजर्व है।
भारत के पास कितने दिन का तेल रिजर्व – बीबीसी की एक रिपोर्ट में ऊर्जा मामलों के एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के हवाले से कहा गया है कि भारत की कुल जरूरत का 90 फीसदी तेल आयात किया जाता है। वह अब तक रूस से काफी तेल खरीदता रहा है, मगर अमेरिका की रोक के बाद इसमें कमी आई है।
भारत के स्ट्रैटेजिक रिजर्व, टैंक फॉर्म्स, रिफाइनरीज और कॉमर्शियल सबको मिलाकर 50-60 दिन का तेल है। यह तकरीबन 25 करोड़ बैरल (करीब 4,000 करोड़ लीटर) है, जिसमें क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडॅक्ट शामिल हैं। सारे टैंक खाली नहीं किए जा सकते हैं तो ऐसे में भारत के पास 40 दिन का ही तेल है।
भारत के ये ऑयल रिजर्व कहां रखे गए हैं – मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत के ये रिजर्व मंगलौर, पादुर, विशाखापत्तनम में बड़ी-बड़ी अंडरग्राउंड स्ट्रैटेजिक गुफाओं में रखा गया है। साथ ही कुछ तेल स्टोरेज टैंकों, पाइपलाइन और तटीय जहाजों में रखा जाता है। वहीं, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। सरकार हालात पर नजर रखे हुए है।
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