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‘भारत का रूस से तेल खरीदना हमारे लिए फायदेमंद’, अमेरिकी सीनेटर ने ट्रंप के U-टर्न पर कबूला सच


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल रूसी तेल खरीदने की वजह से भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का जुर्माना लगाया था। ट्रंप प्रशासन के अधिकारी रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत के खिलाफ जहर उगल रहे थे। उनका कहना था कि तेल खरीदकर भारत रूस के युद्ध को फंड कर रहा है। अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने तो यूक्रेन युद्ध को ‘भारत का युद्ध’ तक कह डाला था। लेकिन अब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के रूसी तेल खरीदने पर बहुत बड़ा यूटर्न ले लिया है।
अमेरिका अब खुद भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए कह रहा है। वाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत को ‘एक महीने की इजाजत’ दी है। इस रविवार को रूस के 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद पहली बार तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई। इसके दुनिया भर के देशों पर गंभीर असर डाला है। जिसे देखते हुए भारत ने एक बार फिर से रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया है।
भारत के रूसी तेल खरीदने पर ट्रंप का यूटर्न – नई दिल्ली की मुश्किल को मानते हुए अमेरिका ने पिछले हफ्ते भारतीय रिफाइनर कंपनियों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी है। अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम ‘ग्लोबल मार्केट में तेल का फ्लो जारी रखने के लिए’ उठाया गया है।
अमेरिका के सीनेटर रोजर मार्शल ने खुद सीएनएन से बात करते हुए सच कबूल किया है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदता है तो ये अमेरिका के लिए फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि ‘भारत के रूस से तेल खरीदने पर लगे तेल बैन हटाना, मुझे लगता है कि अभी अमेरिका के लिए कुछ अच्छा हो रहा है।’ सीएनएन के होस्ट ने सीनेटर रोजर मार्शल से पूछा था कि खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस, ईरान को इंटेलिजेंस जानकारियां दे रहा है फिर भी अमेरिका ने रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में छूट दे दी है क्या आपको लगता है कि ट्रंप प्रशासन का ये सही फैसला है?
इसपर बोलते हुए सीनेटर रोजर मार्शल ने कहा कि ‘देखिए ये काफी जटिल है। जैसे भारत को रूसी तेल खरीदने से छूट देना ऐसा कुछ है जो अभी अमेरिका के लिए फायदेमंद है। लेकिन आपको एक वक्त में एक चीज पर ध्यान देना होगा और परिस्थितियां कैसे बदलती हैं उसपर हर दिन के हिसाब से फैसले लेने होंगे। मुझे भी रूस की कोई जरूरत नहीं है लेकिन ये सारी बहुत चुनौतीपूर्ण स्थिति है।’