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95% इंटरनेट टिका है केबलों पर: समुद्र के नीचे की वो दुनिया, जिससे चलता हैआपका गूगल और फेसबुक


क्या आपने कभी सोचा है कि न्यूयॉर्क से भेजा गया कोई ईमेल भारत में महज कुछ ही सेकंड में कैसे पहुंच जाता है। या फिर कई किलोमीटर दूर बैठे आपके दोस्त को कैसे वीडियो कॉल लग जाता है। अगर आप सोचते हैं कि ऐसा अंतरिक्ष में मौजूद किसी सैटेलाइट के जरिए होता है तो ऐसा नहीं है। इसके पीछे समुद्र के नीचे बिछे केबलों का एक बड़ा जाल है। यह उन ग्लोबल कम्युनिकेशन को पावर देता है, जिन पर आजकल लोग पूरी तरह निर्भर करते हैं। 5 मिनट के लिए इंटरनेट का बंद हो जाना भी लोगों पर भारी पड़ता है। अगर इन केबल को नुकसान पहुंचेगा तो पूरी दुनिया में इंटरनेट ठप पड़ सकता है।
कैसे काम करते हैं केबल? – समुद्र के नीचे बिछे केबल को सबमरीन कम्युनिकेशन केबल भी कहा जाता है। ये फाइबर-ऑप्टिक केबल होते हैं। इन्हें समुद्र के नीचे बिछाया जाता है और इनका इस्तेमाल अलग-अलग महाद्वीपों के बीच डेटा भेजने के लिए किया जाता है। ये ग्लोबल इंटरनेट की रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। ईमेल, वेबपेज और वीडियो कॉल समेत ज्यादातर इंटरनेशनल कम्युनिकेशन को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाते हैं।
95% इटरनेट इन पर निर्भर – दुनिया भर में जितना भी डेटा एक जगह से दूसरी जगह जाता है, उसका 95% से भी ज्यादा हिस्सा इन्हीं समुद्र के नीचे बिछे केबलों से होकर गुजरता है। इसका मतलब है कि 95 प्रतिशत इंटरनेट इन केबलों पर ही निर्भर करता है।
एक सेकंड में ट्रांसमिट कर सकती हैं दो दर्जन फिल्म – ये केबल हर सेकंड कई टेराबिट डेटा ट्रांसमिट कर सकती हैं। यह आज उपलब्ध डेटा ट्रांसफर का सबसे तेज और सबसे भरोसेमंद तरीका है। बता दें कि एक टेराबिट प्रति सेकंड इतनी तेज रफ्तार होती है कि यह पल भर में लगभग एक दर्जन दो घंटे की 4K HD फिल्में ट्रांसमिट (भेज) कर सकती है। इसका मतलब है कि इनमें से सिर्फ एक केबल लाखों लोगों के एक साथ वीडियो देखने या मैसेज भेजने का काम संभाल सकती है।
कई मील लंबी होती हैं केबल – medium.com की रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र में लगभग 485 समुद्री केबलें बिछी हैं। इनकी कुल लंबाई 9,00,000 मील से ज्यादा है। ये केबलें अटलांटिक और प्रशांत महासागरों के साथ-साथ स्वेज नहर जैसे रणनीतिक रास्तों और महासागरों के अंदर के अलग-थलग इलाकों तक फैली हुई हैं।
हर साल कट जाती हैं 100-150 केबल – प्रत्येक समुद्री केबल में कई ऑप्टिकल फाइबर (कांच या प्लास्टिक के पतले तार) होते हैं। फाइबरों को बंडल किया जाता है और सुरक्षा के लिए कई परतों में लपेटा जाता है ताकि वे समुद्री वातावरण जैसे दबाव, घिसाव और मछली पकड़ने की गतिविधियों या जहाजों के लंगर से होने वाले संभावित नुकसान का सामना कर सकें। केबल आमतौर पर एक बगीचे की नली जितनी चौड़ी होती हैं। हर साल, लगभग 100 से 150 समुद्री केबल कट जाती हैं। ज्यादातर ऐसा गलती से मछली पकड़ने के सामान या एंकर की वजह से होता है। ये केबल अक्सर ऐसी जगहों पर होती हैं, जहां एकांत हों।
कैसे सुरक्षित रहती हैं केबल? – समुद्र के नीचे बिछे केबलों को कई तरीकों से सुरक्षित रखा जाता है। इसकी शुरुआत रणनीतिक मार्ग योजना से होती है। इन केबलों को मजबूत मटेरियल से बनाया जाता है। इसमें स्टील का कवच भी शामिल है ताकि वे समुद्र की कठोर परिस्थितियों और चोटों का सामना कर सकें। इन उपायों के अलावा, कुछ विशेषज्ञों ने केबलों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों में संशोधन करने का सुझाव भी दिया है, ताकि किसी देश की ओर से हो रही तोड़फोड़ को रोका जा सके।