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खामेनेई के खात्मे के बाद ईरान विस्‍फोटक, ट्रंप युद्ध से भागने को ढूंढ रहे बहाने, आज जंग खत्म हुई तो कौन विजेता?


डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ चल रहे जंग से भागने के लिए जीतने का नैरेटिव फैला रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप की नीति हिटलर के सलाहकार गोएबेल्स की नीति अपनाने में माहिर हैं। वो अपने झूठ पर कायम रहते हैं और बार बार झूठ बोलते रहते हैं। ईरान के खिलाफ उनके जीत के दावे ऐसे ही हैं। वो किसी भी वक्त जंग खत्म करने का ऐलान कर सकते हैं। वाइट हाउस में इस युद्ध को खत्म करने की जो प्लानिंग बन रही है उसमें एकतरफा घोषणा की जाएगी की ईरान ने सरेंडर कर दिया है।
अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ का कहना है कि सिर्फ ट्रंप ही यह तय कर सकते हैं कि युद्ध ‘शुरुआत में है, बीच में है या आखिर चरण में है।” ऐसा लगता है जैसे उनके बॉस ही इस बढ़ते क्षेत्रीय विवाद के बीच असलियत तय करने वाले अकेले शख्स हैं। लेकिन ईरान के क्रांतिकारी नेता अमेरिका को रत्ती भर भी जीत का श्रेय लेने देने के मूड में नहीं हैं। वो आखिरी दम तक लड़ने की बात कर रहे हैं। वो शहादत पाने तक जंग के मैदान में डटे रहने की बात कर रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमला कर एक ऐसे युद्ध में फंस चुके हैं जो जिसका असर अब उनके कार्यकाल के खत्म होने तक बना रहेगा। मिडिल ईस्ट में में हिंसा के हर एक नल को खोला जा चुका है और कई नये संघर्ष की पटकथा लिख दी गई है। जबकि अमेरिका पर एक और युद्ध से जलील होकर भागने का इल्जाम लगने वाला है। वियतनाम, इराक, अफगानिस्तान। अमेरिका हर एक युद्ध से भागा ही है और अब ईरान में भी ऐसा ही होने वाला है।
वाइट हाउस युद्ध से भागने की तैयारी क्यों कर रहा? – पूरी दुनिया में तेल गैस संकट- दुनिया में तेल और गैस को लेकर गंभीर संकट छा गया है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत दुनिया के वो देश जहां होर्मूज स्ट्रेट से तेल और गैस की सप्लाई होती है वो बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। ये संकट आर्थिक तबाही के दरवाजे को धक्का दे रहा है। अमेरिका पर भी इसका असर पड़ा और ट्रंप की राजनीतिक स्थिति इससे काफी कमजोर हो सकती है।
ट्रंप के शांति दूत की छवि खत्म- ट्रंप बार बार खुद को शांति दूत बताकर नोबेल पुरस्कार मांगते रहे हैं। लेकिन इस लड़ाई ने उनके दावों को चकनाचूर कर दिया है। उन्होंने अमेरिकी सैनिकों को बाहर के देशों में भेजने की आलोचना की है लेकिन ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिक मारे जा रहे हैं।
लंबी लड़ाई में फंसने का डर- अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ वाइट हाउस में शेखी बघार रहे थे कि ट्रंप प्रशासन, बुशा या ओबामा प्रशासन वाली गलती नहीं करेगा। अमेरिका एक लंबी लड़ाई में नहीं फंसेगा। लेकिन हकीकत ये है कि ईरान एक लंबी जंग लड़ने के मूड में है। अमेरिका अगर युद्ध से भागेगा तो ईरान का शासन और ज्यादा मजबूत, कठोर और तानाशाही होगा। फिर उसे कोई डर नहीं रहेगा।
युद्ध की वजह बताने में नाकाम- डोनाल्ड ट्रंप अभी तक बताने में नाकाम रहे हैं कि ईरान पर हमले का आदेश उन्होंने क्यों दिया था? वो सिर्फ हल्ला कर रहे हैं कि ईरान के आत्मसमर्पण तक युद्ध जारी रहेगा लेकिन कैसे, इसका भी कोई जवाब उनके पास नहीं है। उन्होंने उन सवालों को भी टाल दिया कि ईरान कैसे अमेरिका पर हमला करने वाला था, या मिडिल ईस्ट को कैसे तबाह करने वाला था या वो दो-तीन हफ्तों में कैसे परमाणु बम बनाने वाला था?
सत्ता परिवर्तन की कोशिश नाकाम- अयातुल्ला अली खामेनेई को युद्ध के पहले ही दिन मार दिया गया लेकिन ईरान के शासन ने घुटने नहीं टेके। ईरानी नेता सिर पर कफन बांधकर लड़ रहे हैं। जबकि ट्रंप ईरान के लिए अगले नेता की बात करते रहे। लेकिन उन्होंने कोई नाम नहीं बताया है कि अगर सरकार का सत्ता परिवर्तन होता है तो अगला नेता कौन होगा? असलियत ये है कि अमेरिका के पास ईरान के नेता के लिए कोई नाम नहीं है।
अमेरिका के खिलाफ जीत का ऐलान कैसे कर सकता है ईरान? – ईरान के नेता अपने नैरेटिव को पूरी ताकत के साथ दुनिया के सामने रख रहे हैं। उसने घुटने टेकने से इनकार क दिया है। वो लंबी लड़ाई की बात कर रहा है। इसमें कोई शक नहीं कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के मिसाइल इन्फ्रास्ट्रक्चर, न्यूक्लियर और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भयानक नुकसान पहुंचा है लेकिन वो अभी भी खुद को ताकतवर योद्धा की तरह पेश कर रहा है। इसीलिए अगर आज की तारीख में युद्धविराम होता है तो दोनों पक्ष जीत के दावे कर सकते हैं।