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‘ईरान धमकियों के सामने नहीं झुकेगा’, गालिबाफ ने ट्रंप को दिखाया कड़ा रुख, युद्ध पर दी चेतावनी


ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि मौजूदा माहौल में अमेरिका के साथ बातचीत मुश्किल है। उन्होंने कहा है कि ईरान धमकियों के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करेगा और युद्ध के मैदान में जाने के लिए तैयार है। गालिबाफ ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान का आत्मसमर्पण चाहते हैं या फिर युद्ध में वापस जाने का बहाना ढूंढ रहे हैं। गालिबाफ का बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका की दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी चल रही है।
पाकिस्तान में पहले दौर की बातचीत में ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद गालिबफ ने डोनाल्ड ट्रंप पर धमकी देने और संघर्ष-विराम के उल्लंघन के जरिए कूटनीति को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अमरिका बातचीत को ‘समर्पण की मेज’ में बदलने की कोशिश ना करे। जरूरत पड़ने पर ईरान युद्ध के मैदान में नए पत्ते खोलने के लिए तैयार है।
ट्रंप ने दी है धमकी – गालिबाफ की टिप्पणी डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद आई है। ट्रंप ने कहा कि अगर पाकिस्तान में होने वाली बातचीत में समझौता नहीं होता है तो फिर ईरान में बहुत सारे बम फटने लगेंगे। ट्रंप ने यह भी कहा है कि ईरान को उनकी ओर से एक अच्छा प्रस्ताव दिया जा रहा है, जिसे मान लेना ही तेहरान के लिए फायदेमंद होगा। इस पर ईरानियों की ओर से सख्त रुख दिखाया गया है।
ईरान ने हाल की अमेरिकी कार्रवाइयों का हवाला देते हुए चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर संदेह जताया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के साथ एक फोन कॉल में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि वाशिंगटन की ओर से उकसाने वाली कार्रवाइयां और बार-बार संघर्ष विराम का उल्लंघन बातचीत में अहम बाधा बन रही है।
अमेरिकी अधिकारी गैर-रचनात्मक और विरोधाभासी संकेत भेज रहे हैं। वे ईरान का आत्मसमर्पण चाहते हैं लेकिन डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकियों को ये समझ लेना चाहिए कि ईरानी लोग जोर-जबरदस्ती के आगे नहीं झुकते। हम अमेरिका के सामने सरेंडर नहीं करेंगे। मसूद पेजेश्कियान
ईरानी राष्ट्रपति का आया बयान – ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी अमेरिकी रवैये की आलोचना है। पेजेश्कियान ने कहा कि गहराता अविश्वास दोनों देशों के बीच सार्थक बातचीत की संभावनाओं को लगातार कमजोर कर रहा है। किसी बातचीत के लिए प्रतिबद्धताओं का पालन करना अनिवार्य है लेकिन वॉशिंगटन ने लगातार विरोधाभासी और गैर-रचनात्मक संकेत भेजे हैं।
पेजेश्कियान ने अपने बयान में कहा कि प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना किसी भी सार्थक बातचीत की नींव है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के हालिया कदम और बयान एक कड़वा संदेश देते हैं कि वे ईरान का समर्पण चाहते हैं। ऐसा रवैया सफल नहीं होगा क्योंकि ईरानी लोग किसी भी जोर-जबरदस्ती के आगे नहीं झुकेंगे।