
भारत में ब्रिक्स देशों के उप विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों की 24 अप्रैल को एक अहम बैठक हुई। यह बैठक ब्रिक्स के मिडिल ईस्ट एंड नॉर्थ अफ्रीका (MENA) रीजन के देशों के बीच हुई। मीना रीजन के पास सबसे अहम तेल और गैस का अपार खजाना है। भारत 2026 में ब्रिक्स देशों की अध्यक्षता कर रहा है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट बाधित हो गया, जिससे भारत समेत दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल-गैस की लाइफलाइन रुक-रुककर हो पा रही है। ऐसे में भारत चुप बैठने वाला नहीं था, उसने ब्रिक्स के मीना क्षेत्र के देशों के साथ तेजी से बातचीत शुरू कर दी। इनमें प्रमुख देश ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) , सऊदी अरब और मिस्र जैसे देश हैं। मगर, सऊदी अरब एक दुविधा में फंसा हुआ है। भारत ने ब्रिक्स मीना के देशों से तब बातचीत तेज की है, जब इस बीच कच्चे तेल की कीमतें हाल ही में एक बार फिर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं।
विदेश मंत्रालय ने बताया-MENA को लेकर हुई ब्रिक्स की बात – विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्वीट कर बताया कि नई दिल्ली में ब्रिक्स के उप विदेश मंत्रियों और विशेष दूत मीना (MENA) को लेकर मिले। रीजन में मौजूदा हालात को लेकर चर्चा की। सभी सदस्यों ने मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष को लेकर गहरी चिंता जताई। सभी ने अपने विचार व्यक्त किए और इस मामले मे अपने नजरये और आकलन को शेयर किया।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस दौरान फलस्तीन के मुद्दे और गाजा के हालात को लेकर भी चर्चा हुई। इसमें मानवीय मदद मुहैया कराने, यूएनआरडब्ल्यूए(UNRWA) और आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति और लेबनान में सीजफायर का स्वागत पर भी चर्चा हुई।
2027 में चीन की अगुवाई में फिर मिलेंगे सभी देश – विदेश मंत्रालय ने बताया कि BRICS7-MENA के सभी देशों ने UNIFIL पर अस्वीकार्य हमलों, सीरिया में संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण और पुनर्वास, यमन में राजनीतिक स्थिरता, इराक में विकास और स्थायित्व, लीबिया में राजनीतिक प्रक्रिया और सूडान में मानवीय संकट पर भी चर्चा की। इसके बाद सभी 2027 में चीन की अध्यक्षता में मिलने पर सहमत हुए।
Home / News / युद्ध के बीच भारत को मिला ‘खजाने’ का नया रास्ता, ईरान-यूएई सबको सुविधा, सऊदी अरब को क्याें है दुविधा?
IndianZ Xpress NZ's first and only Hindi news website