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शांति वार्ता के बहाने अमेरिका-चीन से डबल गेम, कहीं अपनी ही चाल में फंस ना जाए पाकिस्तान


ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जब साफ कर दिया कि वह अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलेंगे, तो आखिरकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को इस्लामाबाद की यात्रा रद्द करनी पड़ी। डॉनल्ड ट्रंप इन दोनों की अगुआई में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भेजने वाले थे। इस घटना ने पाकिस्तान के खतरनाक दोहरे खेल को फिर से उजागर कर दिया है। ईरान लगातार कह रहा था कि वह अमेरिका के साथ दूसरे दौर की वार्ता नहीं करना चाहता। फिर ट्रंप को किसने भरोसा दिलाया कि इस्लामाबाद में अराघची और अमेरिकी अधिकारियों की मुलाकात संभव है?
चीन नाखुश – कोई भी आसानी से अंदाजा लगा सकता है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ट्रंप को यह भरोसा दिया होगा। उन्होंने कहा होगा कि वह ईरान को अमेरिका के हित में किसी समझौते के लिए राजी कर लेंगे। इसके लिए इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत से पूर्व पाकिस्तान ने इजिप्ट, तुर्किये और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक की। ये सारे ही देश अमेरिका के सहयोगी हैं। हालांकि चीन इस बात से खुश नहीं था कि पाकिस्तान ने उससे सलाह लिए बना इतनी बड़ी कूटनीतिक पहल की।
इशाक तलब – चीन ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार को पेइचिंग तलब कर लिया और 1 अप्रैल को उनसे पांच बिंदुओं वाले समझौते पर साइन कराया गया। इसमें संयुक्त राष्ट्र के नियमों को सबसे ऊपर रखने की बात कही गई। 7 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन ने भी यही बात दोहराई और बहरीन के एक प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। इस प्रस्ताव में होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए रक्षात्मक कदम उठाने की बात कही गई थी।
असफल वार्ता – ईरान को इस्लामाबाद में 11-12 अप्रैल को हुई पहले दौर की वार्ता में ही अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का व्यवहार पसंद नहीं आया था। अमेरिकी अधिकारी लगातार वॉशिंगटन से निर्देश ले रहे थे और वार्ता खत्म होने से पहले इस्राइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से भी बात की। इसके अगले ही दिन अमेरिका ने होर्मुज की नाकाबंदी का ऐलान कर दिया। वहीं, इस्राइल ने लेबनान पर हमले जारी रखे, जबकि पाकिस्तान का दावा था कि संघर्षविराम में लेबनान भी शामिल है।