
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक अहम फैसला लेते हुए ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) छोड़ने का ऐलान लिया है। तेल कार्टेल OPEC को छोड़ने का यूएई का फैसला सऊदी अरब को झटका देने के मकसद से लिया गया है। इससे पहले यूएई ने पाकिस्तान के पेंच कसते हुए उससे अपना कर्ज वापस मांगा था। इन दोनों घटनाक्रमों से लगता है कि यूएई ने पाकिस्तान-सऊदी अरब गठजोड़ के खिलाफ खुलकर आने का फैसला लिया है।
इंडिया टुडे के मुताबिक, यूएई वह देश है, जिसे ईरान के जोरदार हमले सहने पड़े हैं। यूएई चाहता है कि ईरान के खिलाफ मजबूत सैन्य अभियान चलाया जाए। पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर ऐसा होने से रोक दिया। इस भूमिका से इस्लामाबाद को सौदेबाजी में बेहतर स्थिति मिलेगी। दूसरी तरफ यूएई के तेल के ठिकाने तबाह हो गए। इससे वह गुस्से में दिख रहा है।
यूएई क्यों हुआ खफा? – चैथम हाउस के एसोसिएट फेलो नील क्विलियम ने द फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि पाकिस्तान की मध्यस्थ वाली भूमिका से यूएई नाराज हुआ है। वह इस समय चीजों को पूरी तरह से ब्लैक एंड व्हाइट (या तो पूरी तरह सही या पूरी तरह गलत) के नजरिए से देख रहा है। इसमें कोई तटस्थता या बीच का रास्ता नहीं है।
यूएई ने इस्लामाबाद को संकेत दिया था कि वह ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए। इस्लामाबाद ने इसको नहीं माना और खुद को एक मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश किया। यह यूएई को बिल्कुल रास नहीं आया है। ऐसे में यूएई ने पाकिस्तान से अपने 3.5 अरब डॉलर के कर्ज की तत्काल वापसी की मांग कर डाली।
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