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पहले फिलीपींस, फिर ऑस्ट्रेलिया, अब वियतनाम: चीन के पड़ोसियों पर डोरे क्यों डाल रहा जापान, समझें गणित


जापान इन दिनों चीन के खिलाफ आक्रामक विदेश नीति पर काम कर रहा है। इसके लिए वह ऐसे पड़ोसी देशों के साथ गहरे आर्थिक और सैन्य संबंध विकसित कर रहा है, जिनकी चीन से पुरानी दुश्मनी है। जापान ने पहले फिलीपींस के साथ दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता के बीच अपने रक्षा संबंधों को ऐतिहासिक स्तर पर मजबूत किया है। दोनों देशों ने 2024 में पारस्परिक पहुंच समझौते (RAA) पर हस्ताक्षर किए, जो 11 सितंबर 2025 से प्रभावी है। इसके बाद जापान ने ऑस्ट्रेलिया के साथ विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए 7 अरब डॉलर से अधिक के ऐतिहासिक युद्धपोत समझौते पर हस्ताक्षर किया है। अब जापान की नजर वियतनाम पर है।
वियतनाम के साथ संबंधों को मजबूत करेगा जापान – जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने शनिवार को वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने जापान-वियतनाम संबंधों को गहरा करने पर जोर दिया। इस बैठक में जापानी प्रधानमंत्री ने वियतनाम के साथ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। दोनों देशों के नेताओं ने ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष पर ध्यान केंद्रित करते हुए, 2023 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। बैठक के बाद ताकाइची ने कहा, “दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग के लिए आर्थिक सुरक्षा को एक नए प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना है।”
जापान-वियतनाम आर्थिक संबंध – जापान वियतनाम के सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक बना हुआ है, इसके बावजूद आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पहली तिमाही में वियतनाम में नए जापानी निवेश में पिछले वर्ष की तुलना में 75% की गिरावट आई और यह घटकर 233 मिलियन डॉलर रह गया। हालांकि, 2025 के लिए निवेश का वादा पिछले वर्ष की तुलना में 19.4% बढ़कर 3.08 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि द्विपक्षीय व्यापार में पिछले वर्ष की तुलना में 12.3% की वृद्धि हुई और यह 13.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। जापान महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करके दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है, जबकि वियतनाम, विशाल अप्रयुक्त दुर्लभ पृथ्वी और गैलियम संसाधनों के बावजूद, तकनीकी बाधाओं और शोधन में चीन के प्रभुत्व के कारण प्रसंस्करण क्षमता विकसित करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
जापान-फिलीपींस रक्षा संबंध – 8 जुलाई 2024 को जापान और फिलीपींस ने पारस्परिक पहुंच समझौता किया था। इसके तहत दोनों देशों के सशस्त्र बलों को एक-दूसरे के देश में आने-जाने और संयुक्त युद्धाभ्यास करने में आसानी होगी। इसके अलावा जापान फिलीपींस को एक कमांड और कंट्रोल सिस्टम निर्यात करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति के मद्देनजर मनीला को रक्षा प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करने पर टोक्यो के बढ़ते जोर को दर्शाता है। यह सिस्टम एयर डिफेंस मिशन के लिए डिजाइन किया गया है। यह दुश्मन के विमानों और मिसाइलों का पता लगाने के लिए रडार और सेंसर डेटा को इंटीग्रेट करता है। इसके अलावा जानकारी को प्रॉसेस करता है और उसे इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को भेजता है।
जापान ऑस्ट्रेलिया युद्धपोत समझौता – अप्रैल 2026 में, दोनों देशों ने 7 अरब डॉलर से अधिक के ऐतिहासिक युद्धपोत समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत जापान ऑस्ट्रेलिया को 11 उन्नत मोगामी-श्रेणी के फ्रिगेट प्रदान करेगा। इस फ्रिगेट को जापानी कंपनी मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज बनाएगी। इसके अलावा जापान और ऑस्ट्रेलिया ने जनवरी 2022 में पारस्परिक पहुंच समझौता किया था, जिसके दोनों देशों की सेनाओं के एक दूसरे के देश में जाने की छूट मिल गई।
चीन को घेरने की कोशिश में जापान – जापान की रणनीति चीन के पड़ोसी देशों को साधकर एक बड़ा गठबंधन तैयार करना है, जो आपातकालीन स्थितियों में एक दूसरे की मदद के लिए सामने आए। जापान जिन देशों के साथ रक्षा संबंध बना रहा है, उनके चीन के साथ रिश्ते अच्छे नहीं हैं। ऐसे में जापान को उम्मीद है कि चीन के साथ संघर्ष के वक्त ये देश उसके पक्ष में खड़े रहेंगे।