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सिंधु संधि पर आक्रामकता के बजाय अंतरराष्ट्रीय मंचों से गुहार क्यों लगा रहा पाकिस्तान, एक्सपर्ट ने समझाया


कश्मीर के पहलगाम में बीते साल अप्रैल में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 22 लोगों की हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए, जिसमें सिंधु जल संधि (IWT) को निलंबित करना शामिल है। एक साल से ज्यादा समय से यह संधि निलंबित है, जो दोनों देशों के बीच नदियों के पानी का बंटवारा करती है। पाकिस्तान इससे काफी ज्यादा परेशान हुआ है और पानी रोके जाने पर युद्ध करने और खून बहाने जैसी गीदड़भभकियां दी हैं। हालांकि बयानबाजी से इतर हकीकत देखें तो पाकिस्तान ने कोई आक्रामक कदम उठाने के बजाय दुनिया के मंचों पर भारत को घेरने का तरीका अपनाया है।
पाकिस्तान टुडे ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस्लामाबाद ने सिंधु जल संधि के मुद्दे पर गंभीर चुनौतियों के बावजूद सतर्क और अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित दृष्टिकोण अपनाया है। पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने यह कहते हुए अपने लोगों को समझा रहे हैं कि पाकिस्तान ने कानूनी उपायों और सक्रिय कूटनीति पर जोर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उसकी छवि बेहतर हुई है।
‘पाकिस्तान ने लिया कानून का सहारा’ – पाकिस्तान के जल संसाधन अनुसंधान परिषद (PCRWR) के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर मोहम्मद असलम ताहिर ने दावा किया कि इस्लामाबाद ने सिंधु संधि के मुद्दे पर एक जिम्मेदार देश की तरह काम किया। दूसरी ओर भारत सरकार ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का ध्यान ना रखते हुए इंटरनेशनल संस्थाओं को दरकिरनार किया है।
असलम ताहिर कहते हैं कि पाकिस्तान ने भावनात्मक रूप से प्रतिक्रिया देने के बजाय संधि प्रणाली के तहत स्थापित संस्थाओं से संपर्क करके कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया। इनमें मध्यस्थता न्यायालय और तटस्थ विशेषज्ञ शामिल हैं। ये ऐसे आधिकारिक तंत्र हैं, जिन्हें विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए बनाया गया है।
पाकिस्तानी एक्सपर्ट क्यों है खुश – मोहम्मद असलम ताहिर ने दावा किया कि मध्यस्थता न्यायालय और तटस्थ विशेषज्ञों का इस्तेमाल करके पाकिस्तान ने यह दिखाया कि वह टकराव के बजाय कानून के जरिए विवादों को सुलझाने में विश्वास रखता है। असलम ने कहा कि पाकिस्तान ने इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया, जहा विशेष रैपोर्टियरों ने इस गंभीर मुद्दे में दिलचस्पी ली।