
भारत सरकार की ओर से कैलाश मानसरोवर यात्रा का ऐलान किए जाने पर नेपाल ने कड़ा एतराज जताया है। एतराज की वजह इस यात्रा के उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में लिपुलेख दर्रे से जाना है। नेपाल ने भारत के साथ-साथ चीन के सामने भी विरोध दर्ज कराया है क्योंकि यह यात्रा बीजिंग के सहयोग से हो रही है। यह यात्रा इस साल जून से अगस्त के बीच होगी। यात्रा के लिए भारत के ऐलान और इसमें चीन के सहयोग ने नेपाल को नाराज कर दिया है।
नेपाल ने दावा किया है कि लिपुलेख उसका क्षेत्र है। ऐसे में भारत का इस इलाके पर दावा और यहां से यात्रा का ऐलान करना गलत है। नेपाल की बालेन शाह की सरकार ने भारत के लिपुलेख के रास्ते चीन से व्यापार शुरू करने का फैसले पर भी गुस्से का इजहार किया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय की ओर से रविवार को इस पर प्रतिक्रिया दी गई है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने क्या कहा है – कैलाश मानसरोवर यात्रा के बारे में मीडिया आउटलेट्स ने सवालों को उठाया है। यह यात्रा भारत और चीन के बीच नेपाली इलाके लिपुलेख के रास्ते होती है, जिस पर चिंताए हैं।
नेपाल सरकार इस बात पर पूरी तरह से साफ और पक्की है कि महाकाली नदी के पूरब में लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी 1816 की सुगौली संधि के बाद से नेपाल का हिस्सा हैं।
नेपाल सरकार ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के बारे में डिप्लोमैटिक चैनलों के जरिए भारत और चीन दोनों को अपना रुख और चिंता बता दी है क्योंकि यह यात्रा नेपाली इलाके लिपुलेख से होकर जाएगी।
इससे पहले भी नेपाल सरकार लगातार भारत से इस इलाके में सड़क बनाने, बॉर्डर पर व्यापार और तीर्थयात्रा जैसी कोई भी एक्टिविटी ना करने की अपील करती रही है।
इसके अलावा यह साफ किया जाता है कि हमने भारत के साथ-साथ दोस्त देश चीन को भी ऑफिशियली इस बात की जानकारी दी है कि लिपुलेख नेपाल का इलाका है।
नेपाल सरकार ऐतिहासिक संधियों और समझौतों, तथ्यों, मानचित्रों और साक्ष्यों के आधार पर भारत से मैत्रीपूर्ण संबंधों की भावना के अनुरूप कूटनीतिक तरीकों से सीमा मुद्दे को हल करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।
Home / News / ‘लिपुलेख हमारा इलाका है’, मानसरोवर यात्रा पर नेपाल ने भारत को दिखाए तेवर, चीन को भी घेरा
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