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अटलांटिक में क्रूज शिप पर हंता वायरस के दूसरे केस की पुष्टि, 3 लोगों की मौत, समुद्र में खड़ा है जहाज


अटलांटिक महासागर में एक क्रूज शिप पर हंता वायरस के फैल गया है। जहाज से संक्रमण का दूसरा मामला सामने आया है। वायरस के चलते तीन लोगों की मौत हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को बताया कि जहाज पर हंता वायरस संक्रमण के संदिग्ध प्रकोप ने तीन लोगों की जान ली है। संक्रमण से मरने वालों बुजुर्ग कपल भी शामिल है। संक्रमण से कम से कम तीन अन्य लोग बीमार हुए हैं।
डब्ल्यूएचओ के बयान में कहा गया है कि उसकी टीम इन मामलों की जांच चल रही है। हंता वायरस के दो केस की पुष्टि डब्ल्यूएचओ ने कर दी है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया कि मरीजों में से एक का दक्षिण अफ्रीका के अस्पताल में आईसीयू में है। डब्ल्यूएचओ की टीम फिलहाल जहाज से लक्षणों वाले दो अन्य लोगों को निकालने पर काम कर रही है।
समुद्र तट पर खड़ा है जहाज – क्रूज का संचालन करने वाली डच कंपनी ने बताया कि जहाज फिलहाल केप वर्डे के तट के पास खड़ा है। यह अफ्रीका के पश्चिमी तट पर स्थित द्वीपीय देश है। स्थानीय अधिकारियों ने अभी तक किसी को जहाज से उतरने की इजाजत नहीं दी है। कंपनी ने बताया कि जहाज पर मौजूद जिन दो बीमारों को तुरंत मेडिकल देखभाल की जरूरत है, वे क्रू सदस्य हैं।
दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि MV होंडियस नाम के इस जहाज पर डच झंडा लगा है। तीन हफ्ते पहले अर्जेंटीना से यह एक क्रूज यात्रा के लिए निकला था। इस यात्रा में अंटार्कटिका, फॉकलैंड द्वीप और दूसरी जगहों पर रुकना शामिल था। इसे आखिर में अटलांटिक के दूसरी तरफ स्थित स्पेन के कैनरी द्वीप समूह की ओर जाना था।
एक शख्स की जहाज पर ही मौत – दक्षिण अफ्रीकी स्वास्थ्य विभाग ने बयान में बताया कि पहला पीड़ित 70 साल का व्यक्ति था, जिसकी मौत जहाज पर हो गई। उसके शव को ब्रिटिश क्षेत्र सेंट हेलेना में जहाज से उतारा गया। इस व्यक्ति की पत्नी दक्षिण अफ्रीका के हवाई अड्डे पर बेहोश हुई, जब वह अपने गृह देश नीदरलैंड्स के लिए फ्लाइट ले रही थी। उसकी मौत अस्पताल में हो गई।
जोहान्सबर्ग के एक अस्पताल में इंटेंसिव केयर में भर्ती मरीज की पहचान ब्रिटिश नागरिक के तौर पर की गई है। सेंट हेलेना से निकलने के बाद अटलांटिक में स्थित असेंशन द्वीप के पास वह व्यक्ति बीमार पड़ गया था। इसके बाद उसे वहां से दक्षिण अफ्रीका भेज दिया गया।
जहाज पर थे 150 लोग – दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि बीमारी फैलने के समय जहाज पर 150 पर्यटक सवार थे। क्रूज चलाने वाली कंपनी ओशनवाइड एक्सपीडिशंस ने बताया कि तीसरे पीड़ित का शव अभी केप वर्डे में जहाज पर ही है। उसकी प्राथमिकता बीमार क्रू सदस्यों को मेडिकल सहायता है।
इस बीच दक्षिण अफ्रीका के संक्रामक रोग राष्ट्रीय संस्थान ने जोहान्सबर्ग इलाके में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या दक्षिण अफ्रीका में कोई और व्यक्ति भी संक्रमित यात्रियों के संपर्क में आया था।
हंता वायरस क्या है – हंता वायरस पूरी दुनिया में पाए जाते हैं। यह वायरसों का एक ऐसा परिवार है, जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों के पेशाब या मल के संपर्क में आने से फैलता है। इस वायरस संक्रमण के मामले तब चर्चा में आए, जब पिछले साल न्यू मैक्सिको में दिवंगत अभिनेता जीन हैकमैन की पत्नी, बेट्सी अराकावा की हंता वायरस से मौत हो गई।
अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र का कहना है कि हंता वायरस दो गंभीर सिंड्रोम पैदा करते हैं। हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम एक गंभीर बीमारी है, जो फेफड़ों पर असर डालती है। वहीं हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम एक गंभीर बीमारी है, जो किडनी पर असर डालती है। हंता वायरस का कोई खास इलाज या दवा नहीं है लेकिन शुरुआती मेडिकल मदद मिलने से जान बचने की संभावना हो जाती है।
हंता वायरस के बारे में जानें – हंता वायरस चूहों से फैलता है। कोई इंसान चूहों के मल-मूत्र या लार को छूने के बाद अपने चेहरे पर हाथ लगाता है तो संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है।
आमतौर पर हंता वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं जाता है। हंता के संक्रमण का पता लगने में एक से आठ हफ्तों तक का वक्त लग सकता है।
हंता से बुखार, सर्दी, बदन दर्द, उल्टी जैसी दिक्कतें होती हैं। संक्रमित व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर फेफड़ों में पानी भरने और सांस लेने में तकलीफ होती है।
एक्सपर्ट का कहना है कि हंता वायरस में मृत्युदर 38 फीसदी होती है और इस बीमारी का कोई ‘स्पेसिफिक ट्रीटमेंट’ नहीं है। ऐसे में बचाव ही इसका इलाज है।