
भारत में फंगल संक्रमण तेजी से गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। देश के प्रमुख मेडिकल विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कई खतरनाक फंगल बीमारियों में मृत्यु दर 50 फीसदी तक पहुंच चुकी है। एम्स समेत देश के 12 बड़े सरकारी और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ माइक्रोबायोलॉजिस्ट ने इंडियन फंगल इन्फेक्शन नेशनल डिक्लेरेशन (I-FIND) जारी कर केंद्र सरकार से फंगल बीमारियों पर राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की है।
संक्रमण में मृत्यु दर 50 फीसदी – इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल बायोलॉजी में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक भारत की करीब 4.1 फीसदी आबादी गंभीर फंगल संक्रमणों से प्रभावित हैं। इनवेसिव फंगल संक्रमण में तो मृत्यु दर 50 फीसदी तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बोझ देश में हर साल सामने आने वाले टीबी मामलों से करीब 10 गुना अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समय पर पहचान और इलाज नहीं होने पर कई गंभीर फंगल संक्रमणों में मृत्यु दर 95 फीसदी तक पहुंच सकती है।
स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियां – रिपोर्ट के मुताबिक कोविड महामारी के दौरान सामने आए ब्लैक फंगस के मामलों ने भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियां उजागर कर दी थीं। इसके बाद दवा-प्रतिरोधी फंगस तेजी से बढ़े हैं। जो भविष्य में बड़ा खतरा बन सकते हैं। विशेषज्ञों ने कैंडिडा एरिस दवाओं के प्रति प्रतिरोध एस्परजिलस फ्यूमिगेटस फंगस और त्वचा संक्रमण फैलाने वाले फंगस को प्रमुख चिंता बताया है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा – विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज, टीबी, कैंसर, अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी, आईसीयू में भर्ती मरीज और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में फंगल संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है। देश में जागरूकता की कमी, सीमित जांच सुविधाएं और मामलों की कम रिपोर्टिंग के कारण वास्तविक स्थिति और गंभीर हो सकती है। I-FIND घोषणा में राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाने, पांच साल की राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने, फंगल संक्रमण की अनिवार्य निगरानी व्यवस्था लागू करने, बेहतर जांच सुविधाएं विकसित करने, एंटी-फंगल दवाएं मुहैया कराने की सिफारिश की गई है।
Home / News / फंगल इंपेक्शन TB से 10 गुना ज्यादा खतरनाक, जानें इस बीमारी से मौत का कितना खतरा, सामने आई रिपोर्ट
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