
What is LUCAS 3?: क्या आप जानते हैं एक ऐसे फरिश्ते रोबोट के बारे में जो मरीज को मौत के मुंह से भी खींचकर ला सकता है? हम बात कर रहे हैं LUCAS 3 की , जो कि एक CPR देने वाला रोबोट है। यह मरीज की छाती हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट के समय पर लगातार और एक दबाव के साथ दबा सकता है, जिससे लोगों की जान बचाई जा सकती है।
क्या है LUCAS 3? — Lucas 3 automatic CPR: अगर किसी की सांसें थम जाएं या अचानक दिल काम करना बंद कर दे, तो ऐसे समय में जिंदगी और मौत के बीच महज चंद मिनटों का फासला रह जाता है। ऐसे समय में मरीज की जान बचाने का इकलौता तरीका होता है CPR यानी कि कार्डियोपल्मोनरी रिसिसिटेशन। CPR देने में या तो डॉक्टर कुशल होते हैं या फिर इसे ट्रेनिंग के जरिए सीखा जाता है। हालांकि, मेडिकल की दुनिया में एक ऐसा रोबोट आ गया है, जो डॉक्टरों की तरह ही बिना थके, पूरी सटीकता के साथ मरीज की छाती को दबा सकता है, यानी कि CPR दे सकता है। इस रोबोट का नाम LUCAS 3 है और यह स्वीडन की तकनीक पर आधारित मशीन है।
गौर करने वाली बात है कि इंसान लगातार और बिल्कुल एक जैसी ताकत से 5-10 मिनट से ज्यादा CPR नहीं दे सकता लेकिन यह मशीन एम्बुलेंस के हिलने-डुलने या सीढ़ियों से मरीज को उतारते वक्त भी बिना रुके और बिना थके लगातार परफेक्ट CPR दे सकती है।कई देशों ने इस CPR देने वाले इस उस्ताद रोबोट को अपने एम्बुलेंस और अस्पतालों में शामिल किया है। यह उन्नत तकनीक भारत के अस्पतालों में भी इस्तेमाल की जा रही है।
LUCAS 3 स्वीडन में बना एक हाई-टेक ऑटोमैटिक CPR रोबोट है। इसे मेडिकल की दुनिया में फरिश्ते से कम नहीं समझा जाता। यह रोबोट उस समय जान बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है, जब किसी मरीज को हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट आता है। यह मशीन इंसान की छाती पर फिट होकर खुद-ब-खुद परफेक्ट स्पीड और दबाव के साथ छाती को दबाने लगती है। मेडिकल भाषा में इसे CPR कहा जाता है, जो कि एक मर रहे दिल को झटके से वापस चला सकता है।
CPR देते समय बिना थके, लगातार और सटीकता से छाती को दबाया जाना जरूरी होता है, यही काम Lucas 3 बहुत अच्छे से कर सकता है। इसे अब एम्बुलेंस और अस्पतालों में इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर यह मशीन मरीज को CPR दे सके और डॉक्टर दूसरे जरूरी इलाज पर ध्यान दे सकें।(REF.)
कैसे काम करता है Lucas 3? – यह डिवाइस मरीज की छाती पर एक फ्रेम की मदद से फिट हो जाता है। इसे मरीज की पीठ के नीचे एक सपोर्ट बोर्ड लगाकर छाती के ऊपर फिट कर दिया जाता है। इसमें एक खास सक्शन कप भी होता है जो सीधे छाती के बीचों-बीच बैठ जाता है।
ऑन होने पर यह मशीन ऊपर-नीचे होने लगती है। यह मरीज की छाती को ठीक उसी रफ्तार (लगभग 100 से 120 बार प्रति मिनट) और उसी गहराई (लगभग 2 इंच) तक दबाती है, जैसा कि मेडिकल गाइडलाइंस में डॉक्टरों को सिखाया जाता है।
लगातार छाती को दबाने और छोड़ने से मरीज के शरीर और दिमाग में ऑक्सीजन वाले खून का दौरा नहीं रुकता। इस तरह से मरीज के अस्पताल पहुंचने तक उसका दिमाग और बाकी अंग जिंदा रह पाते हैं।
CPR में इंसान बेहतर या ये रोबोट? – इंसान CPR देते हुए 5-10 मिनट में थक जाते हैं। इसके अलावा एक रफ्तार से सही दबाव के साथ लगातार CPR देते रहना भी सभी इंसानों के लिए संभव नहीं है। ऐसे में यह रोबोट बेहतर साबित होता है क्योंकि यह बिना थके घंटों तक परफेक्ट CPR दे सकता है।
रोबोट के इस्तेमाल से डॉक्टरों के हाथ खाली हो जाते हैं और वे मरीज को दूसरी जरूरी दवाइयां देने पर ध्यान लगा पाते हैं।
चलती गाड़ी या मरीज को स्ट्रेचर पर सीढ़ियों से उतारते समय भी यह रोबोट बिना रुके परफेक्ट CPR देता रहता है। ऐसा करना इंसानों के लिए लगभग नामुमकिन हो जाता है।
इसे स्वीडन की लुंड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने बनाया है, जिसे अब ‘Stryker’ कंपनी दुनिया भर के अस्पतालों में पहुंचा रही है।
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