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पीरियड्स के रंग बताते हैं सेहत का हाल, 40 के बाद लापरवाही से महिलाएं बन सकती हैं गंभीर रोगों का शिकार


40 की उम्र के बाद कई महिलाओं के पीरियड्स में बदलाव आने लगते हैं। पहले जो पीरियड्स समय पर आते थे, वे अब कभी जल्दी, कभी देर से आ सकते हैं। पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग कम या ज्यादा हो सकती है और पीरियड्स की अवधि भी बदल सकती है। यह बदलाव अक्सर पेरिमेनोपॉज के कारण होते हैं। पेरिमेनोपॉज वह समय है जब शरीर धीरे-धीरे मेनोपॉज की तरफ बढ़ता है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट हार्मोन जैसे हार्मोन का स्तर कम होने लगता है।
पेरिमेनोपॉज आमतौर पर 40 की शुरुआत में शुरू होता है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह 35 से 38 वर्ष की उम्र में भी दिखाई दे सकता है। यह स्थिति कई वर्षों तक चल सकती है। इस समय महिलाओं को गर्मी लगना, मूड बदलना, नींद की परेशानी और थकान जैसे लक्षण भी महसूस हो सकते हैं। इस लेख में हम मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के पीरियड्स में होने वाले बदलावों के बारे में बता रहे हैं।
40 के बाद पीरियड्स में क्या बदलाव आते हैं ? – 40 की उम्र के बाद भी सामान्य पीरियड्स साइकिल आमतौर पर 21 से 35 दिनों के बीच माना जाता है। पीरियड्स के दौरान रक्तस्राव 2 से 7 दिनों तक रह सकता है। लेकिन इस उम्र में शरीर मेनोपॉज की तैयारी करने लगता है इसलिए हार्मोन में बदलाव होने लगते हैं।
इस समय ओव्यूलेशन यानी अंडा बनने और निकलने की प्रक्रिया नियमित नहीं रहती। इसके कारण शरीर में हार्मोन का स्तर ऊपर-नीचे होता रहता है। यही वजह है कि पीरियड्स कभी जल्दी, कभी देर से आ सकते हैं। रक्तस्राव कम या ज्यादा हो सकता है और पीरियड्स की अवधि भी बदल सकती है।
ये बदलाव अक्सर सामान्य होते हैं और पेरिमेनॉपॉज का हिस्सा माने जाते हैं। यदि बहुत ज्यादा रक्तस्राव हो, पीरियड्स लंबे समय तक चले या बार-बार अनियमितता हो, तो महिला की जांच करवाना जरूरी है। पेरिमेनॉपॉज के दौरान महिलाओं के पीरियड्स में ये बदलाव आ सकते हैं-
पीरियड्स साइकिल का छोटा या लंबा होना – एक या अधिक महीनों तक पीरियड्स का न आना
ज्यादा ब्लीडिंग और क्लॉट्स
सामान्य से कम रक्तस्राव
पीरियड्स के बीच स्पॉटिंग
पीएमएस के लक्षणों का बढ़ना
शरीर के बदलावों पर ध्यान दें – पीरियड्स के कौन से लक्षण नॉर्मल नहीं हैं (सांकेतिक तस्वीर)<br>
पीरियड्स के कौन से लक्षण नॉर्मल नहीं हैं (सांकेतिक तस्वीर)
पेरिमेनपॉज के दौरान कई महिलाओं में पीरियड्स के बदलाव के साथ शरीर में अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। जैसे अचानक बहुत गर्मी लगना (हॉट फ्लैशेस), रात में ज्यादा पसीना आना, मूड जल्दी बदलना, योनि में सूखापन और नींद ठीक से न आना। ये सभी लक्षण पेरिमेनपॉज और हार्मोन बदलाव के कारण होते हैं।
अगर पीरियड्स में कभी-कभार बदलाव हो, तो यह सामान्य हार्मोन बदलाव की वजह से हो सकता है और ज्यादा चिंता की बात नहीं होती। लेकिन अगर रक्तस्राव बहुत ज्यादा हो, तेज दर्द हो या पीरियड्स कई दिनों तक चलते रहें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में महिला की जांच करवाना जरूरी है, ताकि कोई गंभीर समस्या हो तो उसका समय पर पता चल सके।
पीरियड्स के रंग क्या संकेत देते हैं ? – पीरियड्स के रक्त का रंग देखकर किसी बीमारी का इलाज नहीं किया जा सकता, लेकिन असामान्य रंग के साथ दर्द, दुर्गंध या अनियमित स्राव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पीरियड्स का रंग निम्नलिखित संकेत देता है-
ब्राइट रेड कलर- पीरियड्स के ब्लड के इस रंग को आमतौर पर स्वस्थ माना जाता है। यह ताजे रक्त के लगातार बहने का संकेत देता है। यह आमतौर पर मासिक धर्म के सबसे भारी दिनों में देखा जाता है।
डार्क रेड या ब्राउन कलर- ब्राउन ब्लड आमतौर पर पुराना होता है जिसे गर्भाशय से बाहर निकलने में अधिक समय लगा होता है। यह अक्सर पीरियड्स की शुरुआत या अंत में दिखाई देता है और आमतौर पर सामान्य होता है।
पिंक कलर- पिंक कलर का ब्लड एस्ट्रोजन के स्तर में कमी के कारण हो सकता है, जो मेनोपॉज के आसपास के समय में आम है। यह पीरियड्स के दौरान कम ब्लीडिंग होने का संकेत भी हो सकता है।
ऑरेंज कलर- ऑरेंज कलर का डिस्चार्ज कभी-कभी तब हो सकता है जब पीरियड्स का ब्लड सर्वाइकल फ्लूइड के साथ मिल जाता है। अगर इसके साथ दुर्गंध, खुजली या जलन हो, तो यह इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है।
ग्रे कलर- ग्रे कलर का स्राव सामान्य नहीं है और यह इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत जांच करना जरूरी है।
पीरियड्स के ये लक्षण नॉर्मल नहीं हैं –
मेनोपॉज के आसपास के समय में पीरियड्स की अनियमितता आम बात है, लेकिन कुछ लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण फाइब्रॉएड, पॉलीप्स, थायराइड डिसऑर्डर, एंडोमेट्रियोसिस या कैंसर की स्थिति के संकेत भी हो सकते हैं। पीरियड्स के इन संकेतों को नजरअंदाज न करें-
हर घंटे पैड या टैम्पोन का पूरी तरह भीग जाना
सात दिनों से अधिक समय तक रक्तस्राव
फिजिकल रिलेशन के बाद रक्तस्राव
पेल्विक एरिया में तेज दर्द
बड़े ब्लड क्लॉट्स
महीनों तक पीरियड्स न होने के बाद रक्तस्राव
बहुत ज्यादा थकान या चक्कर आना
पीरियड्स के बदलावों को मैनेज करें – पेरिमेनोपॉज के दौरान पीरियड्स में होने वाले बदलावों को आसानी से मैनेज किया जा सकता है। इसके लिए अगर ज्यादा रक्तस्राव हो रहा हो तो आयरन युक्त चीजें खाएं। नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। योग या ध्यान के माध्यम से तनाव को मैनेज करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। पीरियड्स के साइकिल पर नजर रखें। रेगुलर चेकअप कराएं।
मेनोपॉज जीवन का एक स्वाभाविक दौर है, लेकिन इस दौरान महिलाओं को शरीर के हर लक्षण को सामान्य नहीं मानना ​​चाहिए। अपने शरीर की बात सुनना और समय पर जांच करवाना बहुत फायदेमंद हो सकता है। 40 की उम्र के बाद महिलाओं को पीरियड्स के बदलावों को अपने शरीर के संकेतों के रूप में देखना चाहिए। जागरूकता और समय पर देखभाल भविष्य में होने वाली बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम्स को रोक सकती है।