Tuesday , September 1 2026 6:54 PM
Home / Lifestyle / पूरी रात रोता रहा बच्चा, घबराए पेरेंट्स पहुंचे अस्पताल, जांच में सामने आई ऐसी वजह जिसका किसी को भी अंदाजा नहीं था

पूरी रात रोता रहा बच्चा, घबराए पेरेंट्स पहुंचे अस्पताल, जांच में सामने आई ऐसी वजह जिसका किसी को भी अंदाजा नहीं था


आमतौर पर छोटे बच्चे अपनी तकलीफ के बारे में बता नहीं सकते, इसलिए कई बार यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि आखिर वे इतने परेशान क्यों हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में पीडियाट्रिशियन डॉक्टर रवि मलिक के पास आया। डेढ़ साल का बच्चा रात में लगातार रो रहा था। पेरेंट्स ने उसे शांत कराने की हर संभव कोशिश की, लेकिन आराम नहीं मिला। जब वे बच्चे को डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे, तो शुरुआती जांच में भी कोई वजह सामने नहीं आई। हालांकि, बाद में एक ऐसी वजह सामने आई, जिसने चाइल्‍ड स्‍पेशलि‍स्‍ट को भी हैरान कर दिया।
रात में रो रहा था बच्‍चा – पीडियाट्रिशियन डॉक्टर रवि मलिक एक मामले का जिक्र करते हुए बताते हैं कि डेढ़ साल का एक बच्चा रात में लगातार 4 घंटे तक रोता रहा। तड़के सुबह बच्चे के माता-पिता और दादा-दादी उसे लेकर डॉक्टर मलिक की ओपीडी पहुंचे। जब उसके रोने की वजह सामने आई, तो हर कोई हैरान रह गया।
बच्‍चे को बुखार की दवा भी दी – पेरेंट्स ने बताया कि बच्चे को बुखार और कोलिक की दवा देने के साथ-साथ नेजल ड्रॉप्स भी दिए गए थे, लेकिन उसे कोई आराम नहीं मिला। डॉक्टर ने जब बच्चे की जांच की, तो उसे न तो बुखार था और न ही गले, छाती या पेट में कोई समस्या नजर आई। सब कुछ नॉर्मल था। डॉक्टर मलिक बताते हैं कि वे भी परेशान थे कि आखिर बच्चा इतने लंबे समय से लगातार रो क्यों रहा है।
बच्चे का दायां कान में म‍िला कीड़ा – एक्सपर्ट बताते हैं कि इसके बाद जब उन्होंने ओटोस्कोप से बच्चे का दायां कान चेक किया, तो वह खुद भी हैरान रह गए। दरअसल, बच्चे की ईयर कैनाल में एक कीड़ा बैठा हुआ था। जब भी वह कीड़ा हिलता, बच्चे को डिस्कंफर्ट होता और वह रोने लगता था। डॉक्टर ने सावधानी से कीड़े को बाहर निकाला, जिसके बाद बच्चा बिल्कुल ठीक हो गया और कुछ ही देर में हंसने-खेलने लगा।
बच्‍चे की जांच सावधानी से है जरूरी – डॉ. मलिक अंत में कहते हैं कि इस केस से हमें यह सीख मिलती है कि बच्चे के हर सिस्टम की सावधानीपूर्वक जांच करना बेहद जरूरी है। क्योंकि छोटे बच्चे अपनी परेशानी को शब्दों में नहीं बता सकते, इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम समझने की कोशिश करें कि उन्हें आखिर कहां और किस तरह की तकलीफ हो रही है।