
मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) एल्युमिनियम उत्पादन के कारोबार में उतरने की संभावनाएं तलाश रही है। अगर कंपनी इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो यह उसके प्रस्तावित कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट को मेटल मैन्युफैक्चरिंग से जोड़ने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
कंपनी ने अभी इस योजना को अंतिम रूप नहीं दिया है और मामला शुरुआती स्तर पर है। मामले से जुड़े लोगों के हवाले से मिंट ने बताया कि रिलायंस मेटल्स कारोबार में एंट्री की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रही है। वहीं, यूएनआई के मुताबिक, कंपनी ने ओडिशा के कार्लापट बॉक्साइट ब्लॉक के टेंडर डॉक्यूमेंट भी खरीदे हैं।
200 मिलियन टन से अधिक बॉक्साइट – करीब 3100 हेक्टेयर में फैले कार्लापट ब्लॉक में 200 मिलियन टन से अधिक बॉक्साइट होने का अनुमान है। इससे पहले रिलायंस और अडानी ग्रुप समेत कई कंपनियों ने इस ब्लॉक में रुचि दिखाई थी। हालांकि, नीलामी में 175 फीसदी ऑक्शन प्रीमियम की पेशकश के बाद वेदांता एल्युमिनियम की सब्सिडियरी BALCO पसंदीदा बोलीदाता के रूप में उभरी थी।
कोल गैसीफिकेशन की तैयारी – रिलायंस आंध्र प्रदेश में कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट विकसित करने की तैयारी कर रही है।
कंपनी राज्य में रेचेर्ला और चिंतालापुडी के दो कोल ब्लॉक हासिल कर चुकी है।
कोल गैसीफिकेशन की प्रक्रिया में कोयले को सिंथेसिस गैस यानी सिनगैस में बदला जाता है।
इस गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन या औद्योगिक ईंधन के तौर पर किया जा सकता है।
रिलायंस की एल्युमिनियम कारोबार पर नजर क्यों? – रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस एल्युमिनियम कारोबार में उतरती है तो कोल गैसीफिकेशन से पैदा होने वाले ईंधन का इस्तेमाल एल्युमिना रिफाइनिंग और एल्युमिनियम स्मेल्टिंग जैसे ऊर्जा-गहन कामों में किया जा सकता है। इससे कंपनी अपने कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की व्यावसायिक उपयोगिता बढ़ाने की कोशिश कर सकती है।
एल्युमिनियम उद्योग में बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है। बॉक्साइट से एल्युमिना बनाने और इसके बाद एल्युमिनियम स्मेल्टिंग की प्रक्रिया में काफी बिजली और ईंधन की खपत होती है। ऐसे में कोल गैसीफिकेशन और एल्युमिनियम उत्पादन को एक साथ जोड़ना रिलायंस के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।
अडानी ग्रुप का भी बड़ा दांव – रिलायंस की संभावित एंट्री ऐसे समय में सामने आई है, जब अडानी ग्रुप भी एल्युमिनियम कारोबार में बड़ा विस्तार करने की तैयारी कर रहा है। अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने जुलाई में यूएई की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी के साथ मिलकर ओडिशा में 2 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाले एल्युमिनियम प्रोजेक्ट को विकसित करने के लिए करीब 11.5 अरब डॉलर के निवेश की योजना का ऐलान किया था।
अगर रिलायंस भी इस सेक्टर में उतरती है, तो देश के दो बड़े कारोबारी समूहों के बीच एल्युमिनियम कारोबार में सीधी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।
वेदांता और हिंडाल्को की मौजूदगी – भारत के एल्युमिनियम बाजार में पहले से ही बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं। वेदांता एल्युमिनियम करीब 2.5 मिलियन टन सालाना क्षमता के साथ देश की सबसे बड़ी एल्युमिनियम उत्पादक कंपनी है।
आदित्य बिड़ला ग्रुप की हिंडाल्को इंडस्ट्रीज की एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता करीब 1.4 मिलियन टन है। वहीं, सरकारी कंपनी NALCO की क्षमता करीब 0.5 मिलियन टन बताई गई है।
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