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‘सऊदी की रक्षा करने में पाकिस्तान नाकाम, हूतियों ने पकड़ ली गर्दन’, मक्का पैक्ट वाले देशों की ईरान में बैठक पर बोले एक्सपर्ट


सऊदी अरब और यमन के हूतियों के बीच हो रहे घातक संघर्ष के बीच ईरान में एक अहम बैठक हुई है। सोमवार को मक्का समझौते में शामिल देशों- सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान- के शीर्ष अधिकारी तेहरान में ईरानी अधिकारियों से मिले हैं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब ईरान समर्थित यमन के हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब पर लगातार हमले किए हैं और भारी नुकसान पहुंचाया है। रक्षा एक्सपर्ट इस मुलाकात को ईरान की जीत के रूप में देख रहे हैं।
पाकिस्तानी एक्सपर्ट कमर चीमा ने इस मुलाकात को लेकर भारतीय-अमेरिकी एकेडेमिक प्रोफेसर मुक्तदर खान से बात की। प्रोफेसर मुक्तदर खान ने कहा कि हूती हमलों के बाद सऊदी अरब घुटनों पर आ गया है और हर जगह खुद को बचाने के लिए गिडगिड़ा रहा है।
ईरान और हूती मिलकर 32 प्रतिशत ग्लोबल ऑयल ट्रेड कंट्रोल कर रहे हैं। उन्होंने सऊदी अरब और मिस्र दोनों की गर्दनें पकड़ रखी हैं। दोनों की इकोनॉमी तबाह हो सकती हैं। उन्हें यह भी पता चल गया है कि सऊदी अरब के पास रक्षा क्षमता नहीं है। प्रो मुक्तदर खान, भारतीय-अमेरिकी एक्सपर्ट
हूतियों के सामने सऊदी अरब असहाय – प्रोफेसर खान ने आगे कहा कि हूती की मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में असहाय दिख रहा है। ये कुछ वजहें हैं जिसके चलते मक्का पैक्ट के देश ईरान में बातचीत के लिए पहुंचे थे। इस बैठक के बाद ईरान के सिक्योरिटी चीफ मोहसिन रेजाई ने हूतियों के साथ बात की थी, लेकिन इस बातचीत में क्या हुआ, इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई। रेजाई तेहरान में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी शामिल थे।
तेहरान की बैठक में कौन-कौन था? – पाकिस्तान- आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी सऊदी अरब- रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सुल्तान तुर्की- खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन
ईरान- राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रेजाई
ईरानी राष्ट्रपति का इस्लामिक एकता का संदेश – इस बैठक में सबसे अहम बात यह रही कि ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की के प्रतिनिधियों के सामने क्षेत्रीय एकता का आह्वान किया। पेजेश्कियान ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि इस बैठक में महत्वपूर्ण और प्रभावशाली इस्लामिक देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से क्षेत्रीय एकता और आपसी तालमेल को मजबूत करने में मदद मिलेगी।”