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दूसरों की खुशी के लिए अपनी खुशी दबा देते हैं? तो फिर नतीजा भुगतने को भी हो जाइए तैयार


दूसरों को खुश रखने की आदत कई बार इतनी बढ़ जाती है कि इंसान अपनी ही खुशी पर ध्यान देना भूल जाता है। उसे हर समय लगता है कि उसकी किसी बात से सामने वाला दुखी न हो जाए। इसलिए वो अपनी पसंद, गुस्सा, दुख और जरूरतों को दबाता रहता है। धीरे-धीरे उसे खुद भी समझ नहीं आता कि उसे असल में क्या चाहिए। रिश्तों में प्यार और समझ जरूरी है, लेकिन अपनी बात कहना भी उतना ही जरूरी है।
हर किसी को खुश रखने की कोशिश क्यों करते हैं – ​कुछ लोग किसी को नाराज करने से बहुत डरते हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने अपनी पसंद बता दी या किसी बात के लिए मना कर दिया, तो रिश्ता खराब हो सकता है। इसलिए वो बार-बार दूसरों की बात मान लेते हैं। आज बाहर जाने का मन नहीं है, फिर भी चले गए। किसी काम के लिए समय नहीं है, फिर भी हां कह दी। धीरे-धीरे ऐसा करना उनकी आदत बन जाता है और अपनी खुशी हमेशा पीछे चली जाती है।
मुस्कुराते चेहरे के पीछे छिपी होती है थकान – जब इंसान लगातार अपनी भावनाओं को दबाता है, तो अंदर से थकान बढ़ने लगती है। वो सबके सामने हंसता है, बात करता है और सामान्य दिखने की कोशिश करता है, लेकिन अकेले में मन भारी लग सकता है। कई बार छोटी-सी बात पर गुस्सा या चिड़चिड़ापन भी आने लगता है। इसकी वजह सिर्फ वो छोटी बात नहीं होती, बल्कि लंबे समय से मन में जमा कई ऐसी बातें होती हैं, जिन्हें वो किसी से कह नहीं पाया।
मन में जमा होने लगती है अनकही नाराजगी – हर बार दूसरों की खुशी के लिए अपनी पसंद छोड़ने पर मन में धीरे-धीरे नाराजगी जमा हो सकती है। इंसान सोचने लगता है कि मैं सबकी खुशी का ध्यान रखता हूं, लेकिन मेरी खुशी के बारे में कौन सोचता है। सामने से वो कुछ नहीं कहता, लेकिन अंदर ही अंदर उसे बुरा लगने लगता है। परेशानी तब बढ़ती है जब सामने वाला उसकी इस परेशानी को समझ ही नहीं पाता। क्योंकि बिना बताए किसी के मन की हर बात समझना आसान नहीं होता।
अपनी खुशी की बात करना स्वार्थ नहीं है – रिश्ते में अपनी पसंद और जरूरत बताना स्वार्थी होना नहीं है। अगर किसी दिन आराम करने का मन है, किसी जगह जाने की इच्छा नहीं है या किसी फैसले से आप खुश नहीं हैं, तो अपनी बात प्यार से कही जा सकती है। हर बात पर हां कहना अच्छे रिश्ते की निशानी नहीं है। अच्छा रिश्ता वो होता है जहां दोनों लोग एक-दूसरे की खुशी के साथ अपनी खुशी और अपनी पसंद का भी ध्यान रखते हैं।
खुद को खुश रखना भी जरूरी है – दूसरों की खुशी का ख्याल रखना अच्छी बात है, लेकिन अपनी खुशी को हमेशा दबाना ठीक नहीं है। रिश्तों में कभी-कभी अपनी पसंद छोड़नी पड़ सकती है, लेकिन हर बार ऐसा करने से मन में दूरी बढ़ सकती है। इसलिए अपनी पसंद को समझना, जरूरत पड़ने पर ना कहना और अपने लिए थोड़ा समय निकालना जरूरी है। जब इंसान खुद को भी महत्व देता है, तो वो रिश्ते में ज्यादा खुलकर रह पाता है। इससे रिश्ता भी ज्यादा सच्चा और हल्का महसूस होता है।