
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामलों में तेजी से इजाफा होने के बाद गुरूवार को देशव्यापी आपातकाल की घोषणा का फैसला किया है। आबे ने कहा हालात पर काबू पाने के लिए देशव्यापी आपातकाल लागू करना अनिवार्य हो गया है।’’ एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि सरकार वर्तमान में टोक्यो, ओसाका और पांच प्रान्तों जिसमें क्योटो, आइची और होक्काइडो भी शामिल हैं में आपातकाल में विस्तार पर विचार कर रही थी लेकिन देश के अन्य हिस्सों में संक्रमण बढ़ने के कारण इसे देशव्यापी बढ़ाने का फैसला किया है।
एक रिपोर्ट ने उड़ाई शिंजो आबे सरकार की नींद
दरअसल कोरोना वायरस से जूझ रहे जापान में इस महामारी से जुड़ी एक रिपोर्ट ने शिंजो आबे सरकार की नींद उड़ा दी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सरकार ने सख्त कदम नहीं उठाए तो 4 लाख लोगों की जान जा सकती है। जापान में देश में अब तक कोरोना संक्रमण के 8,626 मामले सामने आए हैं। इस महामारी से अब तक 178 लोगों की मौत हो गई है। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामलों में बहुत तेजी से इजाफा होने के बाद तोक्यो, ओसाका और 5 अन्य प्रांतों में आपातकाल घोषित कर दिया है।
जा सकती है 4 लाख लोगों की जान
जापानी कानून के मुताबिक आपातकाल में भी किसी बिजनस को बंद करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। हालांकि कई कंपनियों ने जानबूझकर वर्क फॉम होम की पॉलिसी शुरू कर दी है। जापान में केवल उन्हीं लोगों की जांच की जा रही है जिनके अंदर कोरोना वायरस के लक्षण हैं। इस बीच जापानी मीडिया ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि अगर देश में सख्त कदम नहीं उठाए गए तो 4 लाख लोगों की जान जा सकती है।
इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 8 लाख 50 हजार लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत पढ़ सकती है। जापान में अभी जिन अन्य क्षेत्रों में आपातकाल घोषित किया गया है, उनमें सैतमा, कांगवा, चीबा, हयोगो और फुकुओका शामिल है। शिंजो आबे सरकार को डर सता रहा है कि देश में बड़े पैमाने पर कोरोना वायरस का प्रसार हो सकता है।
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