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कोरोना वैक्सीन की रेस में सबसे आगे निकले ऑक्‍सफर्ड के वैज्ञानिक


चीन के वुहान स्थित जानवरों के मार्केट से निकला किलर कोरोना वायरस 5 माह में करीब 2 लाख लोगों की जान ले चुका है और 30 लाख अन्य संक्रमित हैं। विवादों के बीच माना जा रहा है कि यह वायरस चमगादड़ के जरिए आया है जबकि ब्रिटेन में सीधे इंसानों पर इसके वैक्सीन के ट्रायल शुरू हो गए हैं। ब्रिटेन में दुनिया में सबसे तेज गति से वैक्सीन बनाने में जिस वायरस का इस्तेमाल हो रहा है वह भी इंसानों के पूर्वज कहे जाने वाले चिम्पैंजी से लिया गया है। ब्रिटेन में बेहद अप्रत्‍याशित तेजी के साथ शुरू हुए इस परीक्षण पर पूरे विश्‍व की नजरें टिकी हुई हैं। वैज्ञानिकों को उम्‍मीद है कि ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्‍सीन ‘ChAdOx1 nCoV-19’ से आने वाले कुछ सप्‍ताह में चमत्‍कार हो सकता है।

6 हजार मरीजों पर होगा परीक्षण
ब्रिटेन में 165 अस्‍पतालों में करीब 6 हजार मरीजों का एक महीने तक और इसी तरह से यूरोप और अमेरिका में सैकड़ों लोगों पर इस वैक्‍सीन का परीक्षण होगा। ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी के संक्रामक रोग विभाग के प्रफेसर पीटर हॉर्बी कहते हैं, ‘यह दुनिया का सबसे बड़ा ट्रायल है।’ प्रफेसर हॉर्बी पहले इबोला की दवा के ट्रायल का नेतृत्‍व कर चुके हैं। उधर, ब्रिटेन के हेल्थ मिनिस्टर मैट हैनकॉक ने कहा है कि दो वैक्सीन इस वक्त सबसे आगे हैं। उन्‍होंने कहा कि एक ऑक्सफर्ड और दूसरी इंपीरियल कॉलेज में तैयार की जा रही हैं। हैनकॉक ने बताया कि आमतौर पर यहां तक पहुंचने में सालों लग जाते हैं और अब तक जो काम किया गया है उस पर मुझे गर्व है।’
प्रफेसर हॉर्बी कहते हैं कि हमें अनुमान है कि जून में किसी समय कुछ परिणाम आ सकते हैं। यदि यह स्‍पष्‍ट होता है कि वैक्‍सीन से लाभ है तो उसका जवाब जल्‍दी मिल सकता है।’ हालांकि हॉर्बी चेतावनी भी देते हैं कि कोविड-19 के मामले में कोई ‘जादू’ नहीं हो सकता है। दरअसल, इंग्लैंड में 21 नए रिसर्च प्रॉजेक्ट शुरू कर दिए गए हैं। इसके लिए इंग्लैंड की सरकार ने 1.4 करोड़ पाउंड की राशि मुहैया कराई है। चीनी वैज्ञानिक पहले चूहों और बंदरों पर पर इसकी वैक्सीन का ट्रायल कर रहे हैं और फिर इंसानों पर। खबर है कि चीन की कम्पनी सिनोवैक बायोटेक ने रीसस बंदरों पर वैक्सीन का ट्रायल करके संक्रमण को रोकने में सफलता पाई है।
10 लाख डोज बनाने की तैयारी
ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी में 10 लाख वैक्सीन की डोज बनाने की तैयारी चल रही है।ऑक्‍सफर्ड की वैक्‍सीन का सबसे पहले युवाओं पर परीक्षण किया जा रहा है। अगर यह सफल रहा तो उसे अन्‍य आयु वर्ग के लोगों पर इस वैक्‍सीन का परीक्षण किया जाएगा। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में जेनर इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर आड्रियान हिल कहते हैं, हम किसी भी कीमत पर सितंबर तक दस लाख डोज तैयार करना चाहते हैं। एक बार वैक्सीन की क्षमता का पता चल जाए तो उसे बढ़ाने पर बाद में भी काम हो सकता है। यह स्पष्ट है कि पूरी दुनिया को करोड़ों डोज की जरूरत पड़ने वाली है। तभी इस महामारी का अंत होगा और लॉकडाउन से मुक्ति मिलेगी। कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए वैक्सीन ही सबसे कारगर उपाय हो सकता है। सोशल डिस्टेंशिंग से सिर्फ बचा जा सकता है।
पहले ही डोज में वैक्‍सीन दिखाएगी असर!
ऑक्‍सफर्ड की टीम के एक सदस्‍य ने बताया कि वैक्‍सीन को बनाने के लिए सबसे सटीक तकनीक का प्रयोग किया गया है। यह वैक्‍सीन पहले ही डोज से दमदार रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सकती है। इस वैक्‍सीन पर शोध का नेतृत्‍व कर रहे प्रफेसर साराह गिलबर्ट कहते हैं कि वे लोग एक संभावित संक्रामक बीमारी पर काम कर रहे थे। इससे उन्‍हें कोविड-19 पर तेजी से काम करने में मदद मिली। उन्‍होंने कहा कि उनकी टीम पिछले लास्‍सा बुखार और मर्स पर काम कर रही थी जो एक अन्‍य कारोना वायरस वैक्‍सीन है। इसकी वजह से कोविड-19 की वैक्‍सीन बनाने में उन्‍हें जल्‍दी हुई। ताजा वैक्‍सीन को बनाने में ChAdOx तकनीक का प्रयोग किया गया है। इस तकनीक का अन्‍य बीमारियों में भी इलाज किया जा सकता है।
उधर, चीनी कंपनी ने कहा कि उसने अपने वैक्सीन की 2 अलग-अलग खुराकों को आठ रीसस मकाऊ (लाल मुंह वाले भूरे बंदर) प्रजाति के बंदरों में इंजेक्ट किया और तीन सप्ताह बाद उन्हें वायरस के संपर्क में लाने पर पता चला कि उनके अंदर किसी तरह का संक्रमण पैदा नहीं हुआ। सभी बंदर प्रभावी स्तर पर SARS-CoV-2 यानी Covid-19 वायरस के संक्रमण से सुरक्षित थे। वायरस से संक्रमित करने के बाद चार बंदरों को वैक्सीन की ज्यादा खुराक दी गई थी और 7 दिन के बाद के नतीजों में उनके फेफड़ों में वायरस का संक्रमण बहुत ही कम देखा गया।
चार अन्य बंदरों को कम खुराक दी गई थी, लेकिन उन्होंने कम वैक्सीन होने के बावजूद अपनी खुद की इम्यूनिटी से वायरस पर काबू पा लिया। इसके विपरीत चार अन्य बंदरों को कोई खुराक नहीं दी गई और वायरस के संक्रमित किए जाने पर उनमें गंभीर निमोनिया हो गया। साइनोवैक ने मानव परीक्षण शुरू करने के तीन दिन बाद 19 अप्रैल को ऑनलाइन सर्वर बायोरेक्सिव पर इस ट्रायल के नतीजे प्रकाशित किए हैं। इसके निष्कर्षों को दुनियाभर के वैज्ञानिकों द्वारा मूल्यांकन किया जाना बाकी है। सिनोवैक के प्रवक्ता यांग गुआंग ने कहा है कि वैक्सीन बनाने में रासायनिक रूप से निष्क्रिय नोवल कोरोनावायरस पैथोजन्स का इस्तेमाल किया जा रहा है जो असली बीमारी के खिलाफ शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाएगा।