
अमेरिका इस वक्त भारत और चीन के बीच सीमा (India-China Border) पर जारी तनावपूर्ण स्थिति पर नजर रख रहा है लेकिन फिलहाल वह इसमें हस्तक्षेप नहीं करने वाला है। वाइट हाउस प्रेस सेक्रटरी केली मैकएननी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात की जानकारी दी है। साथ ही उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 जून को हुई बातचीत में इस मुद्दे पर चर्चा की थी।
केली से जब इस बारे में सवाल किया गया कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत और चीन के बीच मध्यस्थता करेंगे, तो उन्होंने कहा कि इसे लेकर कोई औपचारिक योजना नहीं है। केली ने कहा है, ‘हमें भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और पूर्वी लद्दाख (Ladakh) में हालात के बारे में जानकारी है और हम इस पर नजर रख रहे हैं। हमने भारतीय सेना का बयान देखा है कि हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए हैं, हम अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।’
भारत के 20 जवान हिंसा में शहीद
पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें टिकी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र के बाद अब अमेरिका ने ‘शांतिपूर्ण समाधान’ की उम्मीद जताई है। अमेरिका के गृह विभाग ने हिंसा में शहीद हुई भारत के जवानों के परिवारों से संवेदना प्रकट की है। बता दें कि लद्दाख में हुई हिंसा में भारत के 20 जवान शहीद हो गए जबकि चीन के भी 43 सैनिक हताहत हुए हैं।
1962 के युद्ध की शुरुआत
चीन के संदर्भ में गलवान नदी के क्षेत्र का बेहद दर्दनाक इतिहास है। पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने जुलाई 1962 में भारतीय सेना के पोस्ट को घेर लिया था। यह उन घटनाओं में से एक थी जिनके बाद चीन और भारत के बीच हुए भयानक युद्ध की नींव रखी गई थी। 1962 में गलवान के आर्मी पोस्ट में 33 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे और कई दर्जनों को बंदी बना लिया गया था।
पहले भी हो चुका है ऐसे हथियारों का इस्तेमाल
लद्दाख में हुई ताजा झड़पों में गोली नहीं चली लेकिन इतनी जानें चली गईं। दरअसल, चीन के सैनिकों ने कांटेदार डंडों से भारतीय सेना पर हमला किया। चीन ऐसा पहले भी कर चुका है। इससे पहले डोकलाम में 2017 में जब तनावपूर्ण स्थिति बनी थी तब भी पैन्गॉन्ग सो झील के पास डंडों और पत्थरों का ही सहारा लिया गया था।
पूर्वी लद्दाख में हालात हैं गंभीर
पूर्वी लद्दाख में बने हालात को ज्यादा गंभीर माना जा रहा है। करीब 6000 चीनी टुकड़ियां टैंक और हथियारों के साथ भारतीय सेना के सामने खड़ी हैं। सिर्फ लद्दाख ही नहीं हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्कम और अरुणाचल में भी सैन्य तैनाती की जा चुकी है। 5 मई से दोनों देशों के बीच लद्दाख में तनाव जारी है और दोनों देशों के अधिकारी शांति स्थापना की कोशिश में वार्ता कर चुके हैं। इसी दौरान इस बात पर सहमति जताई गई थी कि LAC पर सेनाएं पीछे हटेंगी।
ट्रंप ने की थी मध्यस्थता की पेशकश
इससे पहले जब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव गहरा रहा था तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश की थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिका मध्यस्थता के लिए इच्छुक भी है, तैयार भी और योग्य भी। हालांकि, भारत और चीन ने आपस में बातचीत कर यह सहमति कायम की थी कि लद्दाख में LAC के पास से अपनी-अपनी सेनाएं पीछे हटाई जाएंगी।
UN ने भी चिंता जताई
वहीं, अमेरिका से पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता एरी कनेको ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, ‘भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हिंसा और मौत की खबरों पर हम चिंता प्रकट करते हैं और दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने का आग्रह करते हैं।’ बॉर्डर के हालात देखते हुए खुद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ विपिन रावत और तीनों सशस्त्र सेनाओं के प्रमुखों के साथ बड़ी बैठक की है।
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