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चीन की धमकी नजरअंदाज, ताइवान और सोमालीलैंड ने बनाए राजनयिक संबंध


सोमालीलैंड स्वतंत्र क्षेत्र के साथ ताइवान ने संबंध स्थापित कर कूटनीतिक जीत हासिल करने में सफलता पाई है। चीन के दबाव के कारण लोकतांत्रिक देश ताइवान के सिर्फ 15 देशों के साथ राजनयिक संबंध हैं जिससे यह संयुक्त राष्ट्र का सदस्य नहीं है और अधिकतर अंतरराष्ट्रीय संगठनों से यह बाहर है जहां पेइचिंग का प्रभाव है।
चीन ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है, जिस पर जरूरत पड़ने पर वह सैन्य ताकत से नियंत्रण करने की धमकी देता है। चुनावों और जनमत सर्वेक्षणों में ताइवान की जनता चीन के साथ राजनीतिक एकीकरण को जोरदार तरीके से खारिज कर चुकी है। सोमालिया में 1991 में गृह युद्ध के बाद सोमालीलैंड उससे अलग हो गया।

‘मित्रता, स्वतंत्रता, लोकतंत्र के आधार पर संबंध’
अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं होने के बावजूद इस क्षेत्र की अपनी सरकार, मुद्रा और सुरक्षा व्यवस्था है। ताइवान के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर एक जुलाई को पोस्ट किए गए बयान में मंत्री जोसेफ वु ने कहा कि दोनों सरकारों ने ‘मित्रता और स्वतंत्रता, लोकतंत्र, न्याय और कानून के शासन के साझा मूल्यों के आधार पर’ संबंध स्थापित करने पर सहमति जताई है।

इस बार केवल समुद्र में होगा युद्धाभ्यास
प्रशांत महासागर में तैनात अमेरिकी नौसेनिक बेड़े के कमांडर ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण इस बार यह अभ्यास केवल समुद्र में ही आयोजित होगा। अलग-अलग देशों के सैनिकों के आपसी मेलजोल को रोकने के लिए और सोशल डिस्टेंसिंग को बढ़ाने के लिए यह फैसला लिया गया है। इस दौरान किसी भी प्रकार का कोई सेमिनार भी आयोजित नहीं किया जाएगा।
भारत, ताइवान समेत 25 देशों की नौसेनाओं को निमंत्रण
अमेरिकी कमांडर ने कहा कि वह 2018 में इस नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने वाले देशों को फिर से आमंत्रित कर रहे हैं। बता दें कि दो साल के अंतराल पर होने वाले इस नौसैनिक अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, ब्रुनेई, कनाडा, चिली, कोलंबिया, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इजरायल, जापान, मलेशिया, मैक्सिको, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, पेरू, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, टोंगा, यूनाइटेड किंगडम, ताइवान और वियतनाम की नौसेनाओं के शामिल होने की संभावना है।
चीन को न्यौता नहीं, ताइवान होगा शामिल
साउथ चाइना सी और कोरोना वायरस को लेकर बढ़ते तनाव के कारण इस बार चीन को इस युद्धाभ्यास के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है। बता दें कि RIMPAC 2018 में चीन को न्यौता दिया गया था लेकिन बाद में अमेरिका ने इसे वापस ले लिया था। वहीं ताइवान को चीन की जगह इस युद्धाभ्यास में शामिल किया जाएगा। बता दें कि ताइवान और चीन में लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।
दमखम दिखाएंगी नौसेनाएं
इस युद्धाभ्यास में मल्टीनेशलन एंटी सबमरीन वॉर, मैरीटाइम इंटरसेप्ट ऑपरेशन, लाइव फायर-ट्रेनिंग इवेंट सहित कई प्रशिक्षण दिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि इस दौरान प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा ले रही नौसेनाएं आपस में सहयोग को बढ़ाने को लेकर भी विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित करेंगी।

सोमालीलैंड की आबादी 39 लाख
वु ने कहा, ‘परस्पर लाभ की भावना से ताइवान और सोमालीलैंड मत्स्य, कृषि, ऊर्जा, खनन, लोक स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग करेंगे।’ वु और सोमालीलैंड के विदेश मंत्री यासिन हागी महमूद ने 26 फरवरी को ताइपे में द्विपक्षीय संबंधों पर हस्ताक्षर किए। ताइवान क्षेत्र के छात्रों को छात्रवृत्ति मुहैया करा रहा है। सोमालीलैंड की आबादी 39 लाख है।

ताइवान पर लगाया सोमाली के नुकसान का आरोप
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने सोमवार को कहा कि चीन का सोमालिया के साथ संबंध है और ताइवान पर आरोप लगाया कि वह ‘सोमाली की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कमतर’ कर रहा है। झाओ ने नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘ताइवान और सोमालीलैंड के बीच आधिकारिक एजेंसी स्थापित करने या किसी तरह के आधिकारिक समझौते का चीन विरोध करता है।’