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इस्लामाबाद में मंदिर निर्माण पर जाकिर नाइक ने उगला जहर, बोला- इस्लामी देश में यह हराम


मलेशिया में रह रहे भगोड़े इस्लामी धर्म गुरु जाकिर नाइक ने एक बार फिर से गैर मुस्लिमों के प्रति विद्वेष फैलाने वाला बयान दिया है। नाइक ने कहा कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर बनाने के सरकारी प्रस्ताव हराम है। किसी भी इस्लामी देश में गैर मुस्लिमों के लिए धार्मिक स्थल बनाने में सरकारी दान नहीं दिया जा सकता। इस्लाम को मानने वाला कोई भी मुस्लिम किसी दूसरे मजहब के धार्मिक स्थलों के निर्माण में चंदा नहीं दे सकता है।
एक ऑनलाइन कार्यक्रम में बोलते हुए जाकिर नाइक ने कहा कि इस्लामाबाद में सरकार अपने पैसों से गैर इस्लामिक धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं कर सकती है। वहीं कोई भी मुस्लिम किसी दूसरे धर्म के निर्माण में चंदा या आर्थिक सहयोग नहीं कर सकता है। इस मुद्दे पर इस्लाम के सभी विद्वानों की लगभग एक राय है। उसने यह भी कहा कि पहले भी ऐसे कई मामलों में फतवे जारी किए जा चुके हैं।
इस्लामी देश में मंदिर बनवाना हराम
नाइक ने इस्लामी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई इस्लामी देश चर्च या मंदिर निर्माण के लिए धन उपलब्ध करवाता है तो इसे हराम माना जाएगा। उसने कहा कि इस्लामी मुल्क में तो किसी गैर मुस्लिम व्यक्ति के धन से मंदिर या चर्च नहीं बनाई जा सकती है तो मुस्लिमों के टैक्स के पैसों से मंदिर निर्माण का सवाल ही नहीं उठता।
इस्लामाबाद में पहली मंदिर का निर्माण बंद
बता दें कि इस्लामाबाद में इमरान सरकार ने हिंदू समुदाय को लुभाने के लिए एक मंदिर निर्माण का प्रस्ताव दिया था। बाद में मुस्लिम कट्टरपंथियों के फतवे के आगे घुटने टेकते हुए पाकिस्तानी सरकार ने पहले हिंदू मंदिर के निर्माण पर रोक लगा दी थी। इस मंदिर का निर्माण पाकिस्‍तान के कैपिटल डिवेलपमेंट अथॉरिटी कर रही थी। पाकिस्‍तान सरकार ने अब मंदिर के संबंध में इस्‍लामिक ऑइडियॉलजी काउंसिल से सलाह लेने का फैसला किया है।
धार्मिक पहलू देखने के बाद होगा फैसला
धार्मिक मामलों के मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने कहा था कि धार्मिक पहलू को देखने के बाद मंदिर को बनाने पर फैसला लिया जाएगा। उन्‍होंने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री इमरान खान अल्‍पसंख्‍यकों के पूजा स्‍थलों के लिए फंड जारी करने पर फैसला लेंगे। मंदिर के निर्माण पर रोक लगाने के बाद उन्‍होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यकों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। हालांकि, लगभग 20 दिन बीतने के बाद भी इस मामले पर फैसला नहीं लिया जा सका है।
मंदिर निर्माण के खिलाफ फतवा जारी
बता दें कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पहला मंदिर बनाए जाने से पहले ही बवाल शुरू हो गया था। कई कट्टरपंथी धार्मिक संस्थाओं ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए इसे इस्लाम विरोधी करार दिया था। कुछ दिन पहले ही इस मंदिर के निर्माण की आधारशिला रखी गई थी। इसके लिए इमरान खान सरकार ने 10 करोड़ रुपये देने की भी घोषणा की थी।
मंदिर निर्माण के लिए सरकारी धन के खर्च पर बवाल
मजहबी शिक्षा देने वाले संस्थान जामिया अशर्फिया ने मुफ्ती जियाउद्दीन ने कहा कि गैर मुस्लिमों के लिए मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल बनाने के लिए सरकारी धन खर्च नहीं किया जा सकता। इसी संस्था ने मंदिर निर्माण को लेकर फतवा जारी करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) के लिए सरकारी धन से मंदिर निर्माण कई सवाल खड़े कर रहा है।
पाक सरकार ने 10 करोड़ रुपये देने का किया था वादा
धार्मिक मामलों के मंत्री पीर नूरुल हक कादरी ने कहा था कि सरकार इस मंदिर के निर्माण पर आने वाला 10 करोड़ रुपये का खर्च वहन करेगी। उन्‍होंने कहा कि मंदिर के लिए व‍िशेष सहायता देने की अपील प्रधानमंत्री इमरान खान से की गई है। इस्‍लामाबाद हिंदू पंचायत ने इस मंदिर का नाम श्रीकृष्‍ण मंदिर रखा है। इस मंदिर के लिए वर्ष 2017 में जमीन दी गई थी।
3 साल से अटका है प्रॉजेक्‍ट
हालांकि मंदिर के निर्माण का काम कुछ औपचारिकताओं की वजह से 3 साल लटक गया था। इस मंदिर परिसर में एक अंतिम संस्‍कार स्‍थल भी बनना है। इसके अलावा अन्‍य हिंदू मान्‍यताओं के लिए अलग जगह बनाई जाएगी। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाकिस्‍तान अल्‍पसंख्‍यकों के लिए नरक बन चुका है। यही नहीं आए दिन हिंदू समुदाय की बच्चियों का अपहरण करके उन्‍हें मुसलमान बना दिया जाता है।