
वैज्ञानिकों ने 21 ऐसी दवाओं की खोज की है, जिनका इस्तेमाल कोरोना वायरस के खिलाफ किया जा सकता है। इमें कुष्ठ रोग की दवा से लेकर कैंसर के उपचार में प्रयोग की जाने वाली दवा तक शामिल है। इनमें से 13 दवाएं अपने ट्रायल के दौरान कोरोना के मरीजों पर सफल साबित हुई हैं।
नेचर में प्रकाशित हुआ अध्ययन
नेचर में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, कैलिफोर्निया में सैनफोर्ड बर्नहम प्रीबिस मेडिकल डिस्कवरी इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने यह खोज की है कि इनमें से चार दवाओं का प्रयोग रेमेडिसविर के साथ की जा सकती है। रेमेडिसविर दवा का उपयोग अभी कई देशों में कोरोना मरीजों को इलाज के लिए किया जा रहा है। इस दवा को यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) पहले ही अपनी मंजूरी दे चुकी है।
रेमेडिसविर
वर्तमान में कई देश कोरोना के उपचार के लिए रेमेडिसविर दवा का उपयोग कर रहे हैं। यह एक एंटी वायरल दवा है जो इबोला के इलाज के लिए बनाई गई थी। लेकिन उस समय इस दवा ने काम नहीं किया था। अब यह दवा कोरोना के रोगियों पर सकारात्मक असर कर रही है। यह दवा कोरोना से मरीजों के मरने की दर को 30 से 60 फीसदी तक कम कर रही है।
ब्लड प्लाज्मा
कोरोना का दूसरा इलाज ब्लड प्लाज्मा है। जो अभी कोरोना वायरस के प्रायोगिक उपचार के लिए अनुमोदित है। इस इलाज को सुरक्षित भी माना गया है, लेकिन यह कितनी अच्छी तरह से काम करता है, इसकी अभी भी जांच चल रही है।
डेक्सामेथासोन
सस्ती स्टेरॉयड डेक्सामेथासोन को भी ब्रिटेन में कोरोना का इलाज करने में प्रभावी पाया गया है। इस दवा का अमेरिका, ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देशों में उपयोग किया जा रहा है। लेकिन, इस दवा के प्रभाव को लेकर भी अभी रिसर्च जारी है।
12000 से अधिक दवाओं की जांच
इसके अलावा करीब दर्जनों ऐसी दवाओं का टेस्ट किया गया है जो संक्रमित लोगों को बचाने में फेल रही हैं। इसके बाद सैनफोर्ड बर्नहेम प्रीबिस मेडिकल डिस्कवरी इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने 12,000 से अधिक दवाओं के एक संपूर्ण डेटाबेस की जांच की, जिसे रेफरम ड्रग रिप्रोज़िंग संग्रह कहा जाता है।
भारतीय मूल के वैज्ञानिक भी शामिल
इस रिसर्च पेपर के वरिष्ठ लेखक डॉ सुमित चंदा ने हांगकांग के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर अध्ययन किया। इस दौरान 21 ऐसे दवाओं की खोज की गई जो कोरोना वायरस के इलाज में प्रभावी साबित हो सकते हैं।
IndianZ Xpress NZ's first and only Hindi news website