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अमीर देशों को उल्टा पड़ सकता है Coronavirus Vaccine पर दांव


अमीर देशों को उल्टा पड़ सकता है Coronavirus Vaccine पर दांवकोरोना वायरस से निपटने के लिए वैक्सीन की खोज में दुनिया के बड़े-बड़े देश और मेडिकल रिसर्च संस्थान लगे हुए हैं। कई देशों की वैक्सीन इस रेस में आगे भी दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में इन्हें पाने की होड़ भी शुरू हो गई है। ब्रिटेन और अमेरिका जैसे अमीर देशों ने संभावित वैक्सीनों की अरबों खुराकों के लिए पहले ही इनकी निर्माता कंपनियों से अरबों डॉलर की डील कर ली है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही अमीर देशों ने पहले से डील कर ली हो, वैक्सीन विकसित होने से सप्लाई होने के बीच कई ऐसी बातें होती हैं, जिनकी वजह से इन देशों को झटका लग सकता है।
दोहराया जाएगा इतिहास?
सभी वैक्सीनें अभी अपने निर्णायक नतीजों का इंतजार कर रही हैं। ऑक्सफर्ड, मॉडर्ना या चीनी सेना की वैक्सीनें भले ही शुरुआती नतीजों में असरदार दिख रही हों, एक बड़ी संख्या में टेस्ट किए जाने के बाद ही इस बात का भरोसा किया जा सकता है कि ये लोगों को दी जा सकती हैं। इसके बावजूद अमेरिका और ब्रिटेन ने Sanofi और GlaxoSmithKline Plc से सप्लाई की डील की है। वहीं, जापान और Pfizer Inc ने भी वैक्सीन की डील की है। यूरोपियन यूनियन भी इस कोशिश में है कि जल्द से जल्द खुराकें हासिल की जा सकें। दुनियाभर की सरकारें और वैक्सीन विकसित करने वाले संस्थान इस बात का दावा तो कर रहे हैं कि इन्हें दुनिया के हर इंसान तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा लेकिन ऐसा होना मुश्किल लग रहा है। 2009 में स्वाइन फ्लू के दौरान भी ऐसा ही हुआ था।
सफल होने के बाद भी कई रुकावटें
लंदन की अनैलेटिक्स फर्म Airfinity के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन यूनियन और जापान ने अब तक संभावित वैक्सीनों की 1.3 अरब खुराकों की डील कर ली है। अभी करीब 1.5 अरब खुराकों की डील किया जाना बाकी है। Airfinity के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर रेसमस बेक हैन्सन का कहना है कि भले ही वैज्ञानिक सफलता के प्रति आप उम्मीद रख रहे हों, फिर भी दुनियाभर के लिए पर्याप्त वैक्सीन नहीं है। अभी आखिरी चरण के ट्रायल के नतीजे, मंजूरी मिलने और फिर उत्पादन का स्तर और गति तेज करने जैसे काम भी बाकी होंगे। उन्होंने एक खास बात यह बताई है कि ज्यादार वैक्सीनों की दो खुराकों की जरूरत पड़ सकती है।

अरबों खुराकों के लिए डील
Brazil ने AstraZeneca के साथ डील की है। ट्रंप प्रशासन ने Sanofi और Glaxo को 2.1 अरब डॉलर निवेश का भरोसा दिया है जिससे अमेरिका को 10 करोड़ खुराकें मिलेंगी जबकि 50 करोड़ और खुराकों का विकल्प खुला रखा गया है। यूरोपियन यूनियन Sanofi-Glaxo के साथ 30 करोड़ खुराकों की डील कर रहा है और दूसरी कंपनियों के साथ भी चर्चा में है। हालांकि, EU का कहना है कि वह जो वैक्सीन लेगा वे पूरी दुनिया के लिए होंगी। चीन ने देश में विकसित होने वाली किसी भी वैक्सीन को वैश्विक स्तर पर बांटने का ऐलान किया है।

‘पर्याप्त खुराकें बनाना है चुनौती’
Airfinity के मुताबिक 2022 की पहली तिमाही तक दुनियाभर में 1 अरब खुराकें बन पाना मुश्किल है। उत्पादन के लिए निवेश की इसमें एक अहम भूमिका है। Sanofi और Glaxo 2021 और 2022 में बड़ी मात्रा में दुनियाभर में खुराकें उपलब्ध कराने की कोशिश में है। इसके लिए वैक्सीन के विकास के बाद उत्पादन और फिर आपूर्ति के प्लान पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। वहीं, WHO कई एजेंसियों के साथ मिलकर बराबर तरीके से ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन पहुंचाने के लिए काम कर रहा है। इसके लिए 18 बिलियन डॉल्र का प्लान भी बनाया गया है जिसके तहत 2021 के अंत तक 2 बिलियन खुराकें बनने का लक्ष्य तय किया गया है।

‘जरूरी नहीं ये वैक्सीनें हों सफल’
Gavi- The Vaccine Alliance के CEO सेथ बर्कली का कहना है कि जरूरी नहीं है जिन कंपनियों की वैक्सीनों पर इन देशों ने डील की हैं, वे सफल हों। ऐसे में उन्होंने कई तरह के समझौते करने होंगे। हो सकता है कि इसकी वजह से नीलामी जैसी नौबत आ जाए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कई सारे समझौतों के जाल की जगह बहुत सी वैक्सीनें विकसित हों और सभी देश इन पर साथ काम करें। WHO के साथ मिलकर Gavi मुहिम चला रहा है, Covax जिसके तहत दुनिया के छोटे-बड़े देश साथ आ रहे हैं और वैक्सीन की उपलब्धि को लेकर काम कर रहे हैं।

क्या है Covax?
Covax के तहत ऐसे देश जो वैक्सीन के लिए पहले से समझौते कर रहे हैं, इन वैक्सीनों के असफल होने की स्थिति में उनके नुकसान का रिस्क कम हो जाएगा जबकि आर्थिक रूप से कमजोर देशों के लिए दूसरे देशों से वित्तीय सहायता मिल सकेगी। अब तक 78 देश Covax से जुड़ने की इच्छा जता चुके हैं। करीब 90 गरीब या मध्यम आर्थिक स्थिति वाले देशों को इस प्रोग्राम से फायदा होगा। हालांकि, फिर भी ऐसी आशंका है कि कई गरीब देश पिछड़ सकते हैं। AstraZeneca Covax से जुड़ चुकी है और Pfizer और BioNTech ने इच्छा जताई है।