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बेरूत धमाके से ताजा हुए WW2 के हिरोशिमा ऐटम बम धमाके के जख्म, 3 लाख बेघर


लेबनान की राजधानी बेरूत में जो धमाके मंगलवार को हुए, उनकी तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि जैसे परमाणु हमला हुआ हो। प्रत्यक्षदर्शियों ने इसकी तुलना 1945 में हुए जापान के ऐटम बम ब्लास्ट से की ही है, वैज्ञानिकों ने भी बताया है कि यह धमाका ऐटम बम हमले से की तीव्रता का 20% था।
बेरूत धमाके से ताजा हुए WW2 के हिरोशिमा ऐटम बम धमाके के जख्म, 3 लाख बेघरलेबनान की राजधानी बेरूत (Beirut Explosion) में मंगलवार दोपहर जैसे भूकंप आया हो। मीलों तक जमीन कंपकंपा रही थी और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता दो भयानक धमाकों ने पूरे शहर की जड़ों को हिला दिया। आसमान में तबाही मचाने वाले ब्लास्ट का धुआं था और आसमान छूतीं इमारतें जमींदोज हो गईं। युद्ध के हालात से पस्त हो चुके बेरूत के साथ-साथ पूरी दुनिया में शांतिकाल के दौरान होने वाले इस सबसे बड़े विस्फोट ने जैसे1945 में जापान के हिरोशिमा में हुए परमाणु ब्लास्ट के डरावने पल दोहरा दिए हों। वहीं, बेरूत के गवर्नर का कहना है कि इस घटना से कम से कम 3 लाख लोग बेघर हो गए हैं।
3 लाख बेघर, 3 अरब डॉलर का नुकसान

हमले के बाद वीरान खंडहर से शहर में अब तक कम से कम 100 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों घायल हो चुके हैं। बेरूत के गवर्नर मरवान अबाउद ने बताया है कि इस त्रासदी ने 3 लाख लोगों को बेघर कर दिया है। करीब आधे शहर में ही 3 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ है। बेरूत की गलियों में राहतकार्य में जुटी रेडक्रॉस की टीम का कहना है कि यह बड़े स्तर की विभीषिका है और हर ओर घटना के पीड़ित हैं। चारों को सड़कों पर गाड़ियां क्षतिग्रस्त हैं और इमारतों का मलबा पड़ा है।
हिरोशिमा-नागासाकी जैसा धमाका
प्रत्यक्षदर्शियों ने यहां तक कहा है कि ऐसा लगा मानो कोई परमाणु हमला हुआ हो। वैज्ञानिकों ने भी कहा कि 2750 टनव अमोनियम नाइट्रेट (Ammonium Nitrate) विस्फोटक से जैसा ब्लास्ट हुआ है वह दूसरे विश्वव युद्ध के दौरान हिरोशिमा में हुए ऐटम बम धमाके की 20% तीव्रता का है। यह इतना शक्तिशाली था कि साइप्रस तक सुने गए ब्लास्ट का धुआं सवेरे तक बंदरगाह से निकलता रहा। गवर्नर ने भी हादसे की तुलना हिरोशिमा-नागासाकी बम धमाके से की है। उन्होंने कहा है कि ऐसी तबाही उन्होंने कभी नहीं देखी थी। 70 साल की माकरूई यर्गेनियन का कहना है, ‘यह एक ऐटम बम धमाके जैसा था। मुझे हर चीज का अनुभव है लेकिन ऐसा कुछ पहले नहीं देखा, 1975-1990 के गृहयुद्ध में भी नहीं।’

खुद तबाह अस्पताल बचा रहे जानें
घटना के बाद मौके पर पहुंचीं ऐंबुलेंस ने लोगों को इलाज के लिए ले जाने का काम शुरू कर दिया था और 4000 से ज्यादा घायलों से रातभर में अस्पताल भर गए। वहीं, धमाके के शिकार अस्पताल भी हुए हैं। Roum अस्पताल ने लोगों से जनरेटर पहुंचाने की अपील की है क्योंकि भारी तबाही के दौरान वह मरीजों को बाहर निकाल रहा है और इस दौरान बिजली की जरूरत है। सेंट जॉर्ज अस्पताल में भी घायलों की भीड़ है। किसी को ऐंबुलेंस ला रही है, कोई मदद लेकर आ रहा है तो कोई खुद ही खून से लथपथ पैदल चला आ रहा है।

मलबे से जिंदगियां बचाने की कोशिश
हालात इतना खराब हैं कि खुद क्षतिग्रस्त अस्पताल के डॉक्टर बाहर सड़कों पर स्ट्रेचर, वीलचेयर और गाड़ियों में लोगों का इलाज कर रहे हैं। रेड क्रॉस का कहना है कि उसके पास घायलों की कॉल लगातार आ रही हैं जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी घरों में फंसे हैं। सिर्फ यही नहीं, बंदरगाह से करीब 6 मील दूर एयरपोर्ट को भी भारी नुकसान पहुंचा है। देखने वाले उस भयानक घटना को याद करते हैं कि कैसे एक बड़े मशरूम के आकार का धुएं का गुबार आसमान को छूने लगा और फिर अचानक ब्लास्ट ने पूरे शहर के परखच्चे उड़ा दिए। जो लोग खुद बच गए वे राहत और बचावकर्मियों के साथ मिलकर मलबे में जिंदगियां तलाशते रहे।
करीब 200 किमी दूर तक असर
बेरूत से करीब 110 मील (180 किमी) दूर साइप्रस में भी लोगों ने एक के बाद एक दो धमाके सुने। यहां तक कि निकोसिया में एक शख्स ने दावा किया कि उनके घर के कांच भी टूट गए। उन्होंने बताया है, ‘हम सही से नहीं जानकारी है कि क्या हुआ या कैसे हुए, जानबूझकर किया गया या हादसा था।’ 1975-1990 के दौरान गृहयुद्ध की वजह से अशांति का दौर देख चुके लेबनान के लोगों को लगा था कि यह कोई भूंकप है और फिर धमाके के बाद लगा कि परमाणु हमला। इस तबाही से उनके जहन में भारी गोलीबारी और इजरायल के हवाई हमलों के साये दौड़ गए।