
कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और एक रहस्यमय अमेरिकी हथियार को लेकर किताब ‘रेज’ में छपी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियां चर्चा का विषय बन गई हैं। खोजी पत्रकार बॉब वुडवर्ड की किताब ‘रेज’ 15 सितंबर से दुकानों पर उपलब्ध होगी। वुडवर्ड ने इस किताब के कुछ अंश और ट्रंप के साक्षात्कार के कुछ हिस्से बुधवार को जारी किए।
यह किताब ट्रंप के उन 18 साक्षात्कार पर आधारित हैं, जो अमेरिका के राष्ट्रपति ने वुडवर्ड को दिसंबर से जुलाई के बीच दिए। इस किताब के कुछ अंश ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ को उपलब्ध कराए गए हैं। वुडवर्ड ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ के संपादक हैं। वुडवर्ड ने लिखा है कि ट्रंप ने उन्हें बताया कि वह जब 2018 में सिंगापुर में उत्तर कोरिया के नेता से पहली बार मिले थे, तब वह उनसे बहुत प्रभावित हुए थे।
किताब के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि किम ने ‘मुझे सब कुछ बताया’ और किम ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने रिश्तेदार की किस प्रकार हत्या की थी। ट्रंप ने वुडवर्ड को बताया था कि सीआईए को इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं है कि प्योंगयांग से कैसे निपटना है। ट्रंप ने किम के साथ अपनी तीन बैठकों को लेकर हुई आलोचनाओं को खारिज किया था। उन्होंने उत्तर कोरिया के बारे में कहा था कि वह अपने परमाणु हथियारों से अपने घर की तरह प्यार करता है और ‘वे इसे नहीं बेच सकते’।
उत्तर कोरिया के पास परमाणु बमों का भंडार, अमेरिका और जापान हैं निशाना
यूएस डिपॉर्टमेंट ऑफ आर्मी हेडक्वॉर्टर की नार्थ कोरिया टेक्टिस नाम की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि किम जोन उन अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए इन हथियारों का त्याग नहीं करेंगे। आर्मी हेडक्वॉर्टर ने अनुमान जताया है कि उत्तर कोरिया के पास 20 से लेकर 60 परमाणु बम है। इसके अलावा उसके पास हर साल 6 नए उपकरणों को बनाने की क्षमता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया के पास लगभग 20 प्रकार के 2,500 से 5,000 टन तक रासायनिक हथियार होने का अनुमान है। संभावना जताई गई है कि उत्तर कोरिया की सेना इन रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल तोपखाने के गोले बनाने में कर सकती है। इसके अलावा किम की सेना ने बॉयोलॉजिकल वेपन को भी विकसित किया है, जिसे किसी भी मिसाइल में फिट किया जा सकता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को इसलिए विकसित कर रहा है क्योंकि उसे लगता है कि परमाणु हमला करने का खतरा उसके दुश्मन देशों को उत्तर कोरिया में तख्तापलट करने की संभावनाओं से रोकेगा। यह भी कहा गया कि किम जोंग उन लीबिया में मुअम्मर गद्दाफी की मौत के गवाह रहे हैं और वह नहीं चाहते कि उत्तर कोरिया में ऐसा हो।
एक तरफ किम जोंग उन परमाणु हथियार बनाने में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी ओर हालात ऐसे के हैं कि देश के नागरिकों के सामने खाने का संकट पैदा हो गया है। चावल, मक्का, फल, मीट और मछली की कमी पड़ने के साथ लोगों को कछुए जैसा जीव terrapin खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। यहां तक कि देश के वैज्ञानिकों ने लोगों को ज्यादा खाना खाने से रोकने के लिए पतला करने वाली गोलियां बांटना शुरू कर दिया है। एक्सपर्ट्स ने देश की नीति को ‘Nukes before Nutrition’ करार दिया है। यानी लोगों को खाना देने से पहले तानाशाह किम जोंग उन परमाणु हथियार बनाने में लगे हुए हैं।
ट्रंप को फरवरी में ही पता था, कोरोना वायरस बहुत घातक
वुडवर्ड ने राष्ट्रपति से पूछा था कि क्या एक श्वेत व्यक्ति के रूप में काले अमेरिकियों के ‘गुस्से और दर्द को बेहतर तरीके से समझना’ उनकी जिम्मेदारी है। इसके जवाब में ट्रंप ने उत्तर दिया था, ‘नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता।’ जब ट्रंप से पूछा किया कि क्या अमेरिका में नस्लवाद है, राष्ट्रपति ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह हर जगह है, लेकिन यह कई स्थानों की तुलना में यहां कम है।’ अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच 2017 में बढ़ रहे तनाव के बीच ट्रंप ने वुडवर्ड से कहा था, ‘मैंने एक परमाणु हथियार- एक हथियार प्रणाली बनाई है, जो इस देश के पास पहले नहीं थी। हमारे पास ऐसा हथियार है, जो आपने कभी देखा या सुना नहीं। हमारे पास ऐसी चीज है, जिसके बारे में (रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन और (चीन के राष्ट्रपति) शी चिनफिंग ने पहले कभी नहीं सुना।’
किताब में दावा किया गया है कि ट्रंप ने यह स्वीकार किया था कि उन्होंने घातक कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे को सार्वजनिक तौर पर इसलिए तवज्जो नहीं दी, क्योंकि वह लोगों में घबराहट पैदा नहीं करना चाहते थे। किताब के अनुसार ट्रंप ने मार्च में बुडवर्ड से कहा था, ‘मैं हमेशा इसे कम महत्व देना चाहता था। मैं अब भी इसे तवज्जो नहीं देना चाहता, क्योंकि मैं लोगों में घबराहट पैदा नहीं करना चाहता।’ ट्रंप ने सात फरवरी को एक अन्य साक्षात्कार में पत्रकारों से कहा था कि कोरोना वायरस बहुत घातक फ्लू है और यह हवा से भी फैल सकता है।
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