
धाकड़ बल्लेबाज मयंक अग्रवाल को करियर में पहली बार किसी दौरे पर तीनों फॉर्मेट में जगह मिली है। उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 13वें सत्र में धांसू बैटिंग से सभी को आकर्षित किया था। मयंक के नाम 11 मैचों में 156.45 के शानदार स्ट्राइक रेट से 424 रन थे। वनडे और टी-20 में ओपनर के तौर पर उन्हें केएल राहुल और शुभमन गिल से कड़ी टक्कर मिल रही है, लेकिन टेस्ट ओपनर के तौर पर सचिन तेंडुलकर ने उनका समर्थन किया है।
ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारत को 3 वनडे, 3 टी-20 और 4 टेस्ट खेलने हैं। टेस्ट में सलामी बल्लेबाजी के बारे में पूछने पर तेंडुलकर ने पीटीआई से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मयंक अग्रवाल का खेलना तय है। उन्होंने कहा, ‘मुझे पता है कि मयंक का खेलना तय है, क्योंकि वह बड़ी पारियां खेल रहे हैं और अगर रोहित फिट और उपलब्ध होते हैं तो उन्हें उतरना चाहिए। ’ तेंडुलकर ने कहा, ‘अन्य खिलाड़ियों (पृथ्वी साव, लोकेश राहुल) के बीच, यह प्रबंधन का फैसला होगा क्योंकि उन्हें पता है कि कौन सा खिलाड़ी फॉर्म में हैं।’
कंगारू टीम पर यह कहा : तेंडुलकर ने कहा कि इस समय ऑस्ट्रेलिया का बल्लेबाजी क्रम बेहतर लग रहा है। उन्होंने कहा, ‘स्मिथ, (डेविड) वॉर्नर और (मार्नस) लाबुशाने अहम होंगे और मुझे यकीन है कि जहां तक तैयारी का सवाल है तो भारतीय टीम कोई कमी नहीं छोड़ेगी।’ भारत के बॉर्डर-गावसकर ट्रोफी अपने पास बरकरार रखने की अच्छी संभावना जताते हुए तेंडुलकर ने कहा, ‘दो सीनियर खिलाड़ियों की टीम में वापसी और लाबुशाने की मौजूदगी से बल्लेबाजी क्रम काफी बेहतर हुआ है। यह अधिक प्रतिस्पर्धी सीरीज होगी और मुझे यकीन है कि भारत इसके लिए तैयार है।’
कोहली के गैरमौजूदगी से बड़ा अंतर, लेकिन हमारी बेंच स्ट्रेंथ मजबूत :तेंडुलकर ने सहमति जताई कि तीन टेस्ट मैचों में विराट कोहली के नहीं खेलने से अंतर पैदा होगा लेकिन यह अन्य खिलाड़ियों को मौका देगा। कोहली अपने पहले बच्चे के जन्म के लिए पहले टेस्ट के बाद भारत वापस आएंगे। उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई संदेह नहीं कि विराट के नहीं होने से बड़ा अंतर पैदा होगा लेकिन साथ ही हमारे पास जिस तरह की बेंच स्ट्रेंथ और प्रतिभा उपलब्ध है उसे देखते हुए यह किसी अन्य के पास खुद को स्थापित करने का अच्छा मौका होगा।’
तेंडुलकर ने कहा कि टेस्ट मैचों में चेतेश्वर पुजारा की मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा, ‘मैं चेतेश्वर पुजारा का नाम विराट के साथ रखूंगा। ये दोनों खिलाड़ी सबसे अधिक समय तक साथ खेले हैं। अजिंक्य रहाणे भी है लेकिन अंतिम एकादश में उसे लगातार उतने मौके नहीं मिले जितने पुजारा और विराट को मिले।’
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