
अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी दिनों में तगड़ा झटका दिया है। कांग्रेस ने रक्षा खर्च फंड (नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट) पर ट्रंप के लगाए गए वीटो को खारिज कर दिया है। बता दें कि ट्रंप के चार साल के राष्ट्रपति पद के कार्यकाल में ऐसा पहली बार हुआ है। ट्रंप के वीटो को खारिज करने में उनकी ही पार्टी के सांसदों ने बड़ी भूमिका निभाई।
पहली बार ट्रंप का वीटो हुआ निष्प्रभावी : इससे पहले ट्रंप ने कुल आठ विधेयकों पर वीटो किया है। जिसके बाद वे विधेयक कभी कानून का शक्ल नहीं ले पाए। लेकिन, इस बार संसद ने एकजुट होकर ट्रंप के वीटो को ही हटा दिया। ट्रंप ने बुधवार को नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट पर वीटो किया था। उस समय भी ट्रंप के सलाहकारों ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी थी।
ट्रंप को विधेयक के प्रावधानों पर थी आपत्ति : अमेरिकी कांग्रेस ने देश की रक्षा नीति पर अगले एक साल में 740 अरब डॉलर के खर्च को मंजूरी दी थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विधेयक के कुछ प्रावधानों को विवादित बताते हुए हस्ताक्षर करने से मना कर वीटो कर दिया। ट्रंप को अफगानिस्तान और यूरोप से अमेरिकी सैनिकों की वापसी को लेकर किए गए प्रावधानों पर आपत्ति थी।
बहुमत से संसद ने हटाया वीटो : अमेरिकी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति का वीटो हटाने के लिए संसद के दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। जिसके बाद सीनेट ने वोटिंग करते हुए सीनेट ने 81-13 के बहुमत से ट्रंप के वीटो को खारिज कर दिया। इस वोटिंग में ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन के सांसदों ने भी वीटो को हटाए जाने के पक्ष में वोटिंग की।
डेमोक्रेटिक पार्टी ने की आलोचना : डेमोक्रेटिक पार्टी ने विधेयक पर वीटो को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना की थी। स्पीकर नैंसी पलोसी ने कहा था कि ट्रंप के इस कदम से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में आ गई थी। आज से दो दिन बाद अमेरिका में संसद के नए सदस्य शपथ लेंगे। वहीं जो बाइडन 20 जनवरी को अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे।
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