
शनि के चांद Enceladus पर धरती की तरह महासागरों की धाराएं होती हैं। कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी की ग्रैजुएट छात्रा ऐना लोबो ने यह दावा किया है। अभी तक माना जाता रहा है कि वहां के महासागर में स्थिरता है। लोबो ने Cassini मिशन के डेटा के आधार पर यह दावा किया है। यह प्रोब शनि और उसके सिस्टम पर नजर रखता है। इसके अलावा एन्वायरन्मेंटल साइंस ऐंड इंजिनियरिंग प्रफेसर ऐंड्रू थॉम्पसन के काम पर भी उन्होंने यह थिअरी दी है।
धरती की तरह Enceladus के महासागर भी नमकीन हैं। लोबो का दावा है कि नमक के स्तर पर में अंतर के कारण ये धाराएं हो सकती हैं। Cassini ने पहले दिखाया था कि इस चांद पर बर्फ की मोटाई अलग-अलग है। यह ध्रुव पर पतली और ईक्वेटर पर मोटी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बर्फ के पिघलने और जमने के कारण होता है। इसकी वजह से महासागर की धाराएं बनती हैं।
कैसे बनती हैं धाराएं? : जब नमकीन पानी जमता है तो आसपास का पानी भारी हो जाता है, जिससे वह डूबने लगता है। बर्फ के पिघलने पर इससे उल्टा होता है। एक कंप्यूटर मॉडल में दिखाया गया है कि ऐसे क्षेत्र जहां बर्फ की मोटाई बदलती है वहां धाराएं बन सकती हैं।
साल 2014 में मिले डेटा से संकेत मिले थे कि क्रेकन 115 फीट गहरी हो सकती है लेकिन ताजा डेटा उससे 10 गुना ज्यादा गहराई दिखा रहा है। इसकी गहराई और इसे बनाने वाले तत्वों से टाइटन की पहेलीनुमा केमिस्ट्री के बारे में ज्यादा जानकारी मिलने की उम्मीद है। यहां इथेन और मीथेन तालाबों, झीलों और नदियों में इकट्ठा होती है। स्टडी के लीड लेखक वलेरियो पोगियाली का कहना है, ‘क्रेकन मेयर का सिर्फ नाम महान नहीं है, बल्कि इसमें चांद की सतह पर मौजूद पानी का 80% हिस्सा मौजूद है।’ (तस्वीर: NASA/JPL-Caltech)
टाइटन की बनावट धरती से काफी अलग है लेकिन इसका भूल काफी मिलता-जुलता सा लगता है। यह हमारे सौर मंडल का इकलौता ऐसा चांद है जिसका मोटा वायुमंडल है। नाइट्रोजन गैस की भारी मौजूदगी धरती के वायुमंडल सी लगती है जिसमें ज्यादातर मात्रा नाइट्रोजन-ऑक्सिजन की है। माना जाता है कि टाइटन पर जीवन संभव हो सकता है। इसीलिए उसे किसी कंटैमिनेशन से बचाने के लिए कसीनी को शनि पर साल 2017 में क्रैश करा दिया गया था। (तस्वीर: © NASA/JPL)
इससे पहले 21 अगस्त, 2014 को इसने यह डेटा इकट्ठा किया था। क्रेकन मेयर की गहराई नापने के लिए वैज्ञानिकों ने रेडार सिग्नल के पानी की सतह से गहराई तक जाकर वापस लौटने का समय नापा और फिर इसकी तुलना की। अभी तक इसके आकार और ध्रुवों से दूरी के आधार पर माना जा रहा था कि इसमें सिर्फ इथेन है लेकिन इस बार मीथेन भी मिली जिससे वैज्ञानिक हैरान रह गए। इस झील की बनावट के आधार पर वैज्ञानिक समझ सकेंगे कि इस चांद पर बारिश का चक्र कैसा है।
जीवन की खोज में Enceladus वैज्ञानिकों का एक अहम लक्ष्य है। इसके अलावा बृहस्पति के चांद Europa पर भी नजर रखी जाती है जहां धरती से ज्यादा पानी माना जाता है। हालांकि, जीवन की संभावना के लिए सिर्फ पानी जरूरी नहीं है, कार्बन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सिजन, फॉसफोरस और सल्फर भी जरूरी है। Cassini से पता चला है कि Enceladus पर लगभग सभी चीजें हो सकती हैं।
इसके अलावा गहरे सागरों में हाइड्रोथर्मल ऐक्टिविटी मानी जाती है, जो पहले सिर्फ धरती पर मानी जाती थी। NASA एक प्रोटोटाइप रोबॉट पर टेस्ट कर रहा है जिसे Buoyant Rover for Under Ice (BRUIE) नाम दिया गया है। इसे भविष्य में मिशन्स के साथ भेजे जाने का प्लान है।
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