
अमेरिकी वायु सेना ने पहली बार स्वीकार किया है कि उसकी ज्वाइंड स्पेशल ऑपरेशन कमांड मध्य पूर्व में एक नए तरह के ड्रोन को उड़ा रही है। बताया जा रहा है कि यह ड्रोन इतना शांत है कि दुश्मन का कोई भी रडार इसे पकड़ नहीं सकता है। सेना ने यह खुलासा पिछले साल इराक के एरबिल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हुए पिपिस्ट्रेल साइनस के एक ग्लाइडर को लेकर मचे बवाल के बाद किया है। दरअसल, यह ड्रोन अमेरिका के लॉन्ग एंड्योरेंस एयरक्राफ्ट प्रोग्राम से संबंधित है, जो चुपके से दुश्मन की खुफिया जानकारी इकट्ठा कर सकता है।
LEAP प्रोग्राम से जुड़ा था यह ड्रोन : अमेरिका के लॉन्ग एंड्योरेंस एयरक्राफ्ट प्रोग्राम (एलईएपी) में शामिल AV009 नाम का एक टॉप सीक्रेट ड्रोन पिछले साल 4 जुलाई, 2020 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। जिसके बाद अमेरिका में इस मिशन और ड्रोन को लेकर काफी बवाल मचा था। अब, वॉर जोन नाम की अमेरिकी वेबसाइट ने फ्रीडम ऑफ इंफॉर्मेशन एक्ट के तहत इस दुर्घटना को लेकर सूचना हासिल की है। जिसमें बताया गया कि लैंडिंग के दौरान यह ड्रोन जमीन से जा टकराया और उसके सामने की ओर लगे प्रोपेलर और लैंडिंग गियर टूट गए। इस दुर्घटना से विमान के दाहिने विंग को काफी नुकसान पहुंचा और पूरा ईंधन बाहर निकल गया।
अमेरिकी वायु सेना ने खराब मौसम को बताया दुर्घटना का कारण : इस रिपोर्ट में अमेरिकी वायु सेना ने दुर्घटना का कारण खराब मौसम को बताया है। हालांकि, इस ड्रोन के मिशन को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है। वायु सेना ने यह भी बताया है कि इस दुर्घटना से उसे कुल 3.4 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। इस खबर का खुलासा सबसे पहले 24 जुलाई 2020 को एयर फोर्स मैगजीन ने किया था। हालांकि, अपने रिपोर्ट में इस मैगजीन ने दुर्घटना के जगह और कारण के बारे में नहीं बताया था। रिपोर्ट में AV009 ड्रोन को रिमोटली पायलट वीकल (RPV) बताया था। यह भी बताया गया था कि दुर्घटनाग्रस्त ड्रोन आरक्यू-170 सेंटिनल हो सकता है।
ड्रोन से ईरान-तुर्की की जासूसी करने का शक : एयरफोर्स ने बताया कि AV009 ड्रोन एयरफोर्स स्पेशल ऑपरेशन कमांड (AFSOC) से जुड़ा हुआ था। यह कमांड अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के लिए भी काम करती है। ऐसे में अंदेशा जताया जा रहा है कि इराक में सीआईए किसी बड़े मिशन को चला रही है। चूंकि, इरबिल से तुर्की, सीरिया और ईरान तीनों नजदीक हैं, ऐसे में सीआईए के ऑपरेशन पर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। इन तीनों देशों के साथ अमेरिका की तनातनी चल रही है। अभी तक सार्वजनिक जानकारी यही थी कि एयरफोर्स की यह कमांड स्टील्थ फीचर वाले आरक्यू-170 ड्रोन को ही उड़ाती है।
यूएस एयरफोर्स लाइफ मैनेजमेंट सेंटर (AFLMC) 2021 की गर्मियों में एक और परीक्षण के लिए प्रोटोटाइप बनाने के लिए तीन फर्मों को ठेका सौंपा है। सोमवार को अमेरिकी वायु सेना ने घोषणा की कि उसने मई 2021 तक मिशनाइज्ड प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए तीन प्राइवेट फर्मों के साथ साझेदारी की है। इसके तहत अमेरिकी डिफेंस कंपनी बोइंग को 25.7 मिलियन डॉलर, जनरल एटॉमिक्स को 14.3 मिलियन डॉलर और क्रैटोस अनमैन्ड एरियल सिस्टम को 37.8 मिलियन डॉलर की राशि दी गई है।
इन तीनों कंपनियों के ड्रोन में ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकी होने के कारण इंसानों के ऑपरेट करने की जरूरत नहीं होगी। ये ड्रोन अमेरिका के स्काईबर्ग वेनगार्ड प्रोग्राम का हिस्सा होंगे। इस प्रोग्राम के तहत ये ड्रोन युद्धकाल में इंसानी पायलटों को हवा में मजबूती प्रदान करेंगे। इनकी सहायता से अमेरिका अपने दुश्मनों पर भारी पड़ेगा। ये हवा में दुश्मन के किसी भी खतरे से निपटने में सक्षम होंगे। इससे अमेरिकी पायलटों के कीमती जान की भी रक्षा होगी।
जिन तीनों फर्म को अमेरिकी वायुसेना ने ड्रोन बनाने का ठेका दिया है, उन्हें इस क्षेत्र में व्यापक अनुभव है। क्रेटोस ने पहले ही XQ-58 Valkyrie ड्रोन को इस प्रोग्राम के शुरूआती चरण के लिए बनाया था। यह स्टील्थ ड्रोन देखने में अमेरिका के एफ-35 और एफ-22 की तरह है। माना जा रहा है कि भविष्य के युद्धों में अमेरिका इसका प्रयोग भी कर सकता है।
बोइंग ने भी ऑस्ट्रेलियाई सेना के लिए इस साल के शुरू में अपने पहले मॉडल को रोल आउट किया था। स्टील्थ तकनीकी से लैस इस ड्रोन का नाम बोइंग एयरपावर ट्रिमिंग सिस्टम या बोइंग लायल विंगमैन प्रोजक्ट रखा गया है। ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस यह ड्रोन खुद के दम पर किसी भी मिशन को अंजाम दे सकता है।
जनरल एटॉमिक्स ने भी हाल ही में अपने प्रयोगात्मक एवेंजर यूएवी की घोषणा की थी। इस ड्रोन को एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की जगह बनाया गया है। बता दें कि एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की ताकत को दुनिया ने अफगानिस्तान, सीरिया, ईराक और लीबिया के युद्ध में देखा है। जहां इसने अपने दुश्मनों की कमर तोड़कर रख दी थी। भारत भी इस ड्रोन को खरीदने की तैयारी में है। एक नए सॉफ्टवेयर अपग्रेड के साथ जीई का एवेंजर यूएवी एयर-टू-एयर कॉम्बैट ड्रिल्स में अपनी ताकत दिखा चुका है।
अमेरिका ने सीक्रेट ड्रोन के बारे में छिपाई जानकारी : आधिकारिक दुर्घटना रिपोर्ट में अमेरिकी वायु सेना ने इस ड्रोन को लेकर विस्तृत विवरण जारी नहीं किया है। हालांकि, इतना जरूर बताया गया है कि इस ड्रोन को सरकारी स्वामित्व में एक कॉन्ट्रैक्टर फर्म ऑपरेट कर रही थी। दस्तावेज में उस व्यक्ति की पहचान भी बताई गई है जो टेक्नोलॉजी सर्विस कॉर्पोरेशन (TSC) का कर्मचारी है और दुर्घटना के समय वही ड्रोन को ऑपरेट कर रहा था।
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