
रामायण में अंगद कुमार ने बताए हैं ये कार्य : मुश्किल हालातों में कैसे धैर्य रखते हुए नियम का पालन करने की बात हो या फिर अपनी खुशियों में क्या छोटा क्या बड़ा सबको शामिल करने की बात हो, यह सबकुछ हमें रामायण से सीखने को मिलता है। या यूं कहें कि रामायण हमें जीवन जीना सिखाती है तो गलत नहीं होगा। ऐसे ही कुछ सीख है जो अंगद कुमार ने रावण को दी थी। उन्होंने लंकापति को कुछ ऐसे कार्य बताएं जो पूरी तरह से वर्जित माने जाते हैं। कहते हैं कि इन्हें करने वाले जातकों का सर्वनाश हो जाता है। आइए जानते हैं…
ऐसी प्रवृत्ति कभी नहीं होनी चाहिए : ईश्वर, संतों और धर्मशास्त्रों का निरादर करने वाली प्रवृत्ति कभी नहीं होनी चाहिए। कहते हैं ईश्वर, संतों और धर्मशास्त्रों की महिमा और महत्व को न समझने वाले जातक मृत प्राय ही होते हैं। इसलिए ऐसी प्रवृत्ति और कार्य से बचें अन्यथा सिवाय सर्वनाश के कुछ भी हाथ नहीं आता।
यह कार्य करना तो दूर सोचना भी नहीं चाहिए : ऐसे जातक जो हमेशा काम वासना के बारे में सोचते रहते हैं। या फिर अपनी इंद्रियों के वशीभूत होकर कामवासना में लिप्त रहते हैं। वह भी मृतप्राय ही होते हैं। इसलिए कामवासना से हमेशा ही दूर रहना चाहिए। कभी भी परस्त्री और परपुरुष के विषय में नहीं सोचना चाहिए अन्यथा ऐसा करने वाले जातकों का केवल नाश ही होता है।
कहीं आप भी तो नहीं करते ऐसा, ध्यान दें : दूसरों का अहित करके धन कमाना या फिर धोखे से दूसरे की संपत्ति हड़पना। या पाप कर्मों से कमाए गये धन से अपना पालन-पोषण करने वाला व्यक्ति मृतप्राय ही होता है। ऐसा करने वाले जातकों का तो नाश होता ही है साथ ही उनके परिवार को भी इसका भुगतान करना पड़ता है। इसलिए ऐसे कार्य करने से बचें।
यह कार्य भी ले जाता है पतन की ओर : अपने छोटे से छोटे और बड़े से बड़े कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना। या फिर अगर दूसरे कार्य करने न आएं तो अपने कार्य को यूं ही छोड़ देना। यह भी मृतप्राय जातकों की ही निशानी है। इसलिए कभी भी कैसी भी परिस्थिति हो दूसरों पर कदापि निर्भर नहीं होना चाहिए। कहते हैं कि ऐसे जातकों और उनके परिवारवालों को भी पतन का सामना करना पड़ता है।
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