
अमेरिका के सीनेट ने चीन और दूसरे देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के मद्देनजर अमेरिकी टेक्नॉलजी को मजबूत करने पर केंद्रित विधेयक पारित कर दिया। इस पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने कहा कि विधेयक चीन की घरेलू राजनीति पर परोक्ष हमला और इसके विकास को रोकने पर केंद्रित है। चीन की विदेश मामलों की समिति ने एक बयान जारी कर अमेरिकी नवोन्मेष और प्रतिस्पर्धा विधेयक पर ‘कड़ी आपत्ति और कड़ा विरोध व्यक्त किया।’
अमेरिका के इस विधेयक को मंगलवार को सीनेट ने पारित कर दिया था। चीन ने बयान में कहा, ‘अमेरिका के आधिपत्य को बनाए रखने के उद्देश्य से इस विधेयक में मानवाधिकार के बहाने चीन से तथाकथित खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है जिससे कि चीन की घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप किया जा सके और चीन को विकास के वैध अधिकार से वंचित किया जा सके।’
डिफेंस तकनीकी पर नजर रखने वाली वेबसाइट फ्लाइटग्लोबल की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन अपने एच-6 स्ट्रेटजिक बॉम्बर्स को हटाकर अब आधुनिक एच-20 स्टील्थ बॉम्बर को तैनात करने की योजना बना रहा है। कई विशेषज्ञों ने यह भी आशंका जताई है कि चीन का यह विमान भी उसके दूसरे अन्य विमानों की तरह तकनीकी की चोरी कर बनाया गया है। इस विमान के पैटर्न अमेरिका के बी-2 और बी-21 बॉम्बर्स से मिलते जुलते हैं। वहीं नेशनल इंट्रेस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन का यह विमान अब भी रहस्यमय बना हुआ है। जबकि अमेरिका के बी -2 और बी -21 बॉम्बर्स कॉम्बेट प्रूवन हैं जिन्हें कई युद्धों और खुफिया मिशन में आजमाया जा चुका है। ऐसे में यह विमान अमेरिका के सामने कोई बड़ी चुनौती खड़ी करने में सफल नहीं हो सकता है।
चीन ने अपने रहस्यमयी H-20 बॉम्बर को पहली बार 2019 में Zhuhai Airshow में प्रदर्शित किया था। वहीं, न्यूज़ीलैंड हेराल्ड की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि H-20 सुपरसोनिक स्टील्थ बॉम्बर चीन की स्ट्राइक रेंज को डबल कर सकता है। दिलचस्प बात यह है कि अभी किसी भी प्लेटफार्म पर इस विमान के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। पेंटागन के 2018 और 2019 के वार्षिक चाइना मिलिट्री पॉवर रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया गया है। 2019 में प्रकाशित अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की वार्षिक चाइना मिलिट्री पॉवर रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन का H-20 विमान 8500 किलोमीटर की दूरी तक हमला करने में सक्षम है। यह परमाणु और गैर परमाणु (पारंपरिक) हथियार ले जाने में सक्षम है।
B-2 स्पिरिट दुनिया के सबसे घातक बॉम्बर माने जाते हैं। यह बमवर्षक विमान एक साथ 16 B61-7 परमाणु बम ले जा सकता है। हाल ही में इसके बेड़े में बेहद घातक और सटीक मार करने वाले B61-12 परमाणु बम शामिल किए गए हैं। यही नहीं यह दुश्मन के हवाई डिफेंस को चकमा देकर आसानी से उसके इलाके में घुस जाता है। इस बॉम्बर पर एक हजार किलो के परंपरागत बम भी तैनात किए जा सकते हैं। यह दुश्मन की जमीन पर हमला करने के लिए सबसे कारगर बॉम्बर माना जाता है।
वर्ष 1997 में एक B-2 स्पिरिट बॉम्बर की कीमत करीब 2.1 अरब डॉलर थी। अमेरिका के पास कुल 20 B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर हैं। यह बॉम्बर 50 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए 11 हजार किलोमीटर तक मार कर सकने में सक्षम है। एक बार रिफ्यूल कर देने पर यह 19 हजार किलोमीटर तक हमला कर सकता है। इस विमान ने कोसोवा, इराक, अफगानिस्तान और लीबिया में अपनी क्षमता साबित की है।
इसमें कहा गया कि किसी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि चीन ऐसी किसी चीज को स्वीकार करेगा जो उसकी संप्रभुता, सुरक्षा या विकास हितों को नुकसान पहुंचाती हो। चीन ने विधेयक में ताइवान का समर्थन किए जाने और हांगकांग का जिक्र किए जाने की भी निन्दा की। ताइवान को चीन जहां अपना हिस्सा बताता है, वहीं हांगकांग में उस पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं।
बयान में कहा गया कि ये सभी मुद्दे ‘पूरी तरह चीन के आंतरिक मामले हैं और इसमें किसी विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।’ चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विधेयक में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है जो चीन के विकास पथ को बाधित करने और उसकी घरेलू तथा विदेश नीति में हस्तक्षेप का प्रयास है।
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