
ब्रिटेन में हो रहे G-7 समिट के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मैन्युअल मैक्रों ने कोरोना वायरस की महामारी के बीच जरूरतमंदों देशों की मदद पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने सदस्य देशों के लगाए एक्सपोर्ट बैन पर भी सवाल उठाया। दरअसल, अमेरिका ने भारत में बन रही Oxford-AstraZeneca की कोरोना वायरस वैक्सीन के लिए जरूरी कच्चे सामान पर बैन लगा दिया था जिससे वैक्सीन उत्पादन को झटका लगा था।
मैक्रों ने कहा है, ‘G7 के कई सदस्य देशों ने कुछ एक्सपोर्ट बैन लगाए हैं जिससे दूसरे देशों में उत्पादन बंद हो गया और कुछ जहों पर मध्य-आय वाले देशओं में उत्पादन बंद हो गया जो गरीब देशों के लिए वैक्सीन के उत्पादन के लिए अहम है। मैं सिर्फ एक उदाहरण रखूंगा- भारत।’ रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने बैन हटाए जाने की अपील की है ताकि सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया भारत की आबादी और दूसरे गरीब देशों, खासकर अफ्रीका के लिए वैक्सीन निर्माण कर सके।
अमेरिका ने लगाया बैन : अमेरिका ने Covishield Coronavirus Vaccine में लगने वाले कच्चे माल के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया था। भारत ने इसे हटाने की अपील की थी जिस पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि हम भारत के अनुरोध को पूरा करने से पहले अपने नागरिकों को प्राथमिकता देंगे। वहीं, अमेरिका जब पिछले साल कोरोना वायरस के संक्रमण से सबसे ज्यादा पीड़ित था, तब भारत ने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध पर हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की करोड़ों टेबलेट्स को निर्यात किया था।
वैक्सीन की खुराकें देने का वादा : भारत में वैक्सीन उत्पादन में मदद की जगह अमेरिका ने वैक्सीन की खुराकें देने का वादा जरूर किया है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने हाल ही में 8 करोड़ खुराकें दनिया के साथ शेयर करने का ऐलान किया था जिसमें से 75 प्रतिशत अतिरिक्त खुराकें संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से चलाई जा रही ‘Covax’ पहल के जरिए आपूर्ति की जाएंगी। अमेरिका जिन देशों को वैक्सीन भेज रहा है उनमें भारत भी शामिल है।
Home / News / G7 Summit 2021: भारत को मिला फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मैन्युअल मैक्रों का साथ, ‘वैक्सीन के कच्चे माल से हटे एक्सपोर्ट बैन’
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