
जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का रहस्य : जन्म हो या मरण यह एक सार्वभौमिक सत्य है। जिसे झुठलाया नहीं जा सकता। लेकिन ज्योतिषशास्त्र में कुछ ऐसे कार्यों का जिक्र मिलता है जिन्हें लेकर मान्यता है कि उन्हें करने वाले जातकों को जन्म-मरण के चक्र में नहीं फंसना पड़ता। यानी कि उन्हें जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। तो आइए ऐस्ट्रॉलजर ऐंड वास्तु एक्सपर्ट सचिन मेहरा से इनके बारे में विस्तार से जानते हैं…
यदि नियमित किया जाए यह कार्य : ज्योतिषशास्त्र के अनुसार अगर कोई जातक नियमितरूप से श्रीमद्भागवत गीता के 11वें अध्याय का पाठ करता है, तो उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। गीता के इस अध्याय में भगवान विष्णु के विशाल रूप का वर्णन मिलता है। यही वजह है कि इसका पाठ करने वाले जातकों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यहां प्राण त्यागने वाले को भी मिलती है मुक्ति : ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शिव की नगर काशी का वर्णन शिव पुराण में भी मिलता है। यह नगरी भोलेनाथ के त्रिशूल पर बसी है। इसके कोतवाल काल भैरव हैं। मान्यता है कि यहां यमराज का प्रवेश पूर्णतया वर्जित है। भोलेनाथ का सुमिरन करते हुए इस स्थान पर जो भी जातक अपने प्राण त्यागते हैं। उन्हें जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।
जन्म-मरण के चक्र से रहते हैं ये भी दूर : ज्योतिषशास्त्र के अनुसार अगर आप कैलाश मानसरोवर का दर्शन कर चुके हों या आपको ऐसा सौभाग्य बार-बार मिलता हो तो समझ लें कि आपके ऊपर शिवजी की विशेष कृपा है। इसके साथ ही कैलाश मानसरोवर के जल का पान करना भी अत्यंत पुण्यकारी है। मान्यता है कि ऐसे जातकों को कभी भी जन्म-मरण के चक्र में नहीं फंसना पड़ता।
इनपर भी होती है ईश्वर की कृपा, मिलती है मुक्ति : ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ऐसे जातक जो नियमित रूप से तुलसी मां की पूजा करते हैं। या फिर भगवान विष्णु को तुलसी मां की मंजरियां अर्पित करते हैं तो उन्हें देवलोक की प्राप्ति होती है। साथ ही ऐसे जातकों को जन्म-मरण के चक्र से भी मुक्ति मिल जाती है।
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