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S-400 missile system: क्रीमिया में रूस को क्या हुआ? अचानक चेक करने लगा S-400 मिसाइल सिस्टम की ताकत

रूस ने अमेरिका और ब्रिटेन के साथ बढ़ते तनाव के बीच क्रीमिया में एस-400 डिफेंस सिस्टम का टेस्ट शुरू किया है। रूसी सैन्य अधिकारी इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम की ऑपरेशनल तैयारियों को जांच रहे हैं। दरअसल, अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य संगठन नाटो इन दिनों काला सागर में ऑपरेशन सी ब्रिज नाम का युद्धाभ्यास कर रहे हैं। क्रीमिया के इतने नजदीक दुश्मन देशों के युद्धाभ्यास करने से रूस चिढ़ा हुआ है। यही कारण है कि उसने दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल डिफेंस सिस्टम को फायर कर अपनी ताकत दिखाई है।
नाटो के युद्धाभ्यास की निगरानी कर रही रूसी नौसेना : नाटो का वार्षिक सैन्याभ्यास सी ब्रिज सोमवार को काला सागर के उत्तर पश्चिम हिस्से में शुरू हुआ। रूसी नौसेना इस युद्धाभ्यास में शामिल होने वाले युद्धपोतों की करीबी से निगरानी कर रही है। रूस के विरोधी देशों के इस युद्धाभ्यास में में 32 देशों के लगभग 5,000 सैनिक और 32 युद्धपोत शामिल हैं। 10 जुलाई तक दुश्मन देशों की सेनाएं रूस के करीब समुद्र में अपने शक्ति का प्रदर्शन करेंगी।
रूसी नौसेना ने बताया-क्रीमिया में क्या हुआ? : रूसी नौसेना के काला सागर बेड़े के प्रवक्ता कैप्टन एलेक्सी रुलियोव ने बताया कि काला सागर बेड़े के विमान और हेलीकॉप्टरों ने दक्षिणी सैन्य जिले के एयरफोर्स फॉर्मेशन के साथ यह युद्धाभ्यास किया। इसमें एस -400 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम और पैंटसिर सेल्फ प्रोपेल्ड मिसाइल और गन सिस्टम को फायर कर उनकी तैयारियों की जांच की गई। इस युद्धाभ्यास में रूसी वायु सेना के Su-24, Su-27, और Su-30SM लड़ाकू विमानों के अलावा Mi-8 और Ka-27 हेलिकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया गया।
क्या काम करता है एयर डिफेंस सिस्टम : इसका काम देश में होने वाले किसी भी संभावित हवाई हमले का पता लगाना और उसे रोकना है। यह तमाम तरह के रेडार और उपग्रहों की मदद से जानकारी जुटाता है। इस जानकारी के आधार पर यह बता सकता है कि लड़ाकू विमान कहां से हमला कर सकते हैं। इसके अलावा यह एंटी-मिसाइल दागकर दुश्मन विमानों और मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर सकता है। भारत ने अब तक रूस से मारने वाले हथियार ही खरीदे हैं। पहली बार भारत रूस से S-400 डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है।
रोसिया 24 टीवी चैनल के अनुसार, पुतिन ने कहा कि रूसी एयरोस्पेस फोर्सेज लगभग 70 प्रतिशत एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल रेजिमेंट आधुनिक S-400 सिस्टम से लैस हैं। इसके बाद बचे हुए रेजिमेंट्स में एस-500 मिसाइल सिस्टम तैनात किया जाएगा। इसके परीक्षण पहले ही सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। S-500 Prometey नाम का यह डिफेंस सिस्टम 400 से 600 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मनों के मिसाइल और लड़ाकू विमानों को मार गिराने में सक्षम है। व्लादिमीर पुतिन ने रक्षा मंत्रालय और रक्षा उद्योग उद्यमों के साथ एक बैठक में कहा कहा कि रूसी सेना को वैश्विक सैन्य शक्तियों की रणनीति के हिसाब से खुद को तैयार रहना चाहिए। सभी प्रकार के सैनिकों को संतुलित और व्यवस्थित तरीके से विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रूस की सामरिक परमाणु क्षमता में भी काफी विकास हुआ है। जल-थल और नभ से परमाणु हथियारों को दागने में रूस बहुत पहले से सक्षम है।
रूसी एयरोस्पेस फोर्स के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट-जनरल आंद्रेई युडिन ने दिसंबर 2020 में एक इंटरव्यू में कहा था कि रूस 2021 में दुनिया के सबसे एडवांस S-500 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम पर अपना काम पूरा कर लेगा। उन्होंने रशिया टूडे बाततीच के दौरान कहा था कि एस-500 मोबाइल एयर डिफेंस और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम विकसित करने का काम 2021 में पूरा होने वाला है। रूस के हथियारों में अब तक का सबसे सबसे उन्नत और आधुनित तकनीकी पर आधारित एंटी-मिसाइल सिस्टम है। पिछले साल ही रूसी उप प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव ने आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के चरणबद्ध परीक्षण की घोषणा की थी।
रूस का दावा है कि उसके S-500 डिफेंस सिस्टम अमेरिका के F-35A लड़ाकू विमान को भी मार गिराने में सक्षम है। वहीं, अमेरिका का दावा है कि उसका F-35A लड़ाकू विमान स्टील्थ तकनीकी से लैस है। जिसे किसी भी रडार के जरिए खोजा नहीं जा सकता है। रूसी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम के जरिए अंतरिक्ष की निचली कक्षा में स्थित दुश्मन के किसी भी सैटेलाइट को भी नष्ट किया जा सकता है। बता दें कि अधिकतर मिलिट्री सैटेलाइट या जमीन पर नजर रखने वाले अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट धरती की निचली कक्षा में ही होते हैं।
S-500 डिफेंस सिस्टम को S-400 के आधार पर ही विकसित किया गया है। माना जा रहा है कि S-500 डिफेंस सिस्टम में 77N6 मिसाइल सीरीज के अलावा कई अन्य मिसाइलें भी तैनात होंगी। इस मिसाइल को दुश्मन के बैलिस्टिक मिसाइल को नष्ट करने के लिए S-400 के नए वर्जन में भी लगाया जाएगा। इस सिस्टम की अधिकतम रेंज 600 किलोमीटर होगी, जो 3 से 4 सेकेंड में प्रतिक्रिया देने में सक्षम होगा। एस-400 की तुलना में इस सिस्टम की मिसाइल 200 किलोमीटर की दूरी 6 सेकेंड कम समय में तय कर लेगी। यह इस बात की ज़िम्मेदारी भी ले सकता है कि दुश्मन की मिसाइल को कौन से फेज़ में गिराना है। लॉन्चिंग के तुरंत बाद, कुछ दूरी पर या करीब आने पर। अगर बूस्ट फेज़ यानी शुरुआत के समय ही मिसाइल ध्वस्त कर दी गई, तो उसके मलबे-राख से भी कोई नुकसान नहीं होगा। इसमें चार तरह की मिसाइल होती हैं। एक मिसाइल 600 किमी की रेंज वाली होती है, दूसरी 250 किमी, तीसरी 120 और चौथी 40 किमी की रेंज वाली होती है।
इसका काम देश में होने वाले किसी भी संभावित हवाई हमले का पता लगाना है। यह तमाम तरह के रेडार और उपग्रहों की मदद से जानकारी जुटाता है। इस जानकारी के आधार पर यह बता सकता है कि लड़ाकू विमान कहां से हमला कर सकते हैं। इसके अलावा यह एंटी-मिसाइल दागकर दुश्मन विमानों और मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर सकता है। भारत ने अब तक रूस से मारने वाले हथियार ही खरीदे हैं। पहली बार भारत रूस से S-400 डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है।
भारतीय लहज़े में कहें, तो बहुत ही सिंपल सी टेक्निक है। इसमें ढेर सारे रेडार लगे होते हैं, जिनसे यह पता लगा लेता है कि ऑब्जेक्ट (जिसे मारना है) कहां है। इसकी क्षमता यह है कि 400 किमी के दायरे में आने वाले किसी भी खतरे को खत्म कर सकता है। फिर खतरा चाहे लड़ाकू विमान हो, ड्रोन हो या मिसाइल हो, यह गिरा देगा। S-500 का जलवा यह है कि इसके रडार 100 से 300 टारगेट ट्रैक कर सकते हैं। 600 किमी तक की रेंज में ट्रैकिंग कर सकता है। इसमें लगी मिसाइलें 30 किमी ऊंचाई और 600 किमी की दूरी में किसी भी टारगेट को भेद सकती हैं। मन करे, तो इससे ज़मीनी ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। सबसे तगड़ी चीज यह कि एक ही समय में यह 600 किमी तक 36 टारगेट को एक साथ मार सकने में सक्षम होगी। इसमें 12 लॉन्चर होते हैं, यह तीन मिसाइल एक साथ दाग सकता है और इसे तैनात करने में पांच मिनट लगते हैं।
एस-400 डिफेंस सिस्टम को और घातक बना रहा रूस : रूस ने अपने एस-400 और एस-300 मिसाइल सिस्टम को और घातक बनाने का काम शुरू कर दिया है। इस सिस्टम में रूस नई तरह की कई मिसाइलों को शामिल करने जा रहा है जो दुश्मन के किसी भी मिसाइल को मार गिराने में सक्षम होंगी। रूस का यह हथियार अपनी कैटेगरी में दुनिया में सबसे बेहतरीन माना जाता है। रूसी समाचार एजेंसी स्पूतनिक की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी रक्षा मंत्रालय ने एस- 300 और एस- 400s के स्टॉक को लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को बढ़ाने और अत्यधिक सटीक शॉर्ट-रेंज डिफेंस प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रकार की मिसाइलों से लैस करने की योजना को मंजूरी दी है।