
भारत के पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने ग्रेग चैपल विवाद को याद करते हुए बताया कि कैसे सचिन तेंदुलकर का समर्थन करने के कारण उन्हें टीम इंडिया की कप्तानी गंवानी पड़ी थी। युवराज ने संजय मांजरेकर के साथ एक शो में बातचीत करते हुए कहा कि सीनियर बल्लेबाज का समर्थन करने के उनके फैसले की कीमत उन्हें भारत की कप्तानी गंवाकर चुकानी पड़ी थी। शायद इसी कारण उन्हें टीम की उप-कप्तानी से भी हटा दिया गया था।
युवराज ने कहा कि मुझे कप्तान बनना था। फिर ग्रेग चैपल की घटना घटी। चैपल या सचिन। मैं शायद एकमात्र खिलाड़ी था जिसने समर्थन किया … कि मैं अपने साथी का समर्थन करता हूं। बीसीसीआई के कुछ अधिकारियों को यह पसंद नहीं आया। तब कहा जाता था कि किसी को भी कप्तान बनाया जा सकता है लेकिन मुझे नहीं- जैसे मैंने सुना।
युवराज बोले- मुझे यकीन नहीं है कि यह कितना सच है। अचानक उप-कप्तानी से मुझे हटा दिया गया। सहवाग टीम में नहीं थे। तो, कहीं से माही (एमएस धोनी) 2007 टी 20 विश्व कप के लिए कप्तान बने। मुझे पहले लगा कि मैं कप्तान बनने जा रहा हूं। वीरू (वीरेंद्र सहवाग) सीनियर थे लेकिन वह इंग्लैंड दौरे पर नहीं थे। मैं वनडे टीम का उप-कप्तान था जबकि राहुल (द्रविड़) कप्तान थे। इसलिए, मुझे कप्तान बनना था। जाहिर है, यह एक ऐसा फैसला था जो मेरे खिलाफ गया लेकिन मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है। अगर आज ऐसा हो तो भी मैं अपनी टीम के साथी का समर्थन ही करूंगा।
बता दें कि युवराज ने धोनी की अगुवाई वाली टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यही टीम 2007 टी 20 विश्व कप जीतकर लौटी थी। इसके बाद 2011 के क्रिकेट विश्व कप में भी युवराज का ऑलराऊंड प्रदर्शन सामने आया था।
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