
ईरान में लड़कियों को स्कूल जाने से रोकने के लिए जहर देने का मामला सुर्ख़ियों में है. इस मामले में ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही उन्होंने अपने दुश्मन पर स्कूली छात्राओं के जहर की लहर का आरोप लगाया है.
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते इस बात का खुलासा हुआ था कि कुछ लोग लड़कियों की शिक्षा को बंद करने के उद्देश्य से पवित्र शहर कोम में स्कूली छात्राओं को जहर दे रहे थे. नवंबर के अंत से, मुख्य रूप से तेहरान के दक्षिण में कोम में स्कूली छात्राओं के सैकड़ों मामले सामने आए थे, जिनमें से कुछ को अस्पताल में इलाज की आवश्यकता पड़ी थी. इस घटना पर उप स्वास्थ्य मंत्री यूनुस पनाही ने माना था कि लड़कियों को जहर जानबूझकर दिया गया था.
इस मामले को ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने बेहद गंभीरता से लिया है. राष्ट्रपति के कार्यालय की वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार, रायसी ने बुधवार को एक कैबिनेट बैठक में निर्देश दिया कि लड़कियों के माता-पिता के साथ-साथ सार्वजनिक चिंताओं को दूर किया जाए. उन्होंने इसके लिए आंतरिक मंत्री अहमद वाहिदितो को जिम्मेदारी सौंपी.
आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, 30 नवंबर, 2022 को क़ोम शहर में पहली बार ऐसे दर्ज किये गए थे, जहां 18 स्कूली छात्राओं में जहर के लक्षण दिखने के बाद उन्हें इजाल के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसके बाद लोरेस्टन के पश्चिमी प्रांत क़ोम, अर्दबील के उत्तर-पश्चिमी प्रांत, केरमानशाह के पश्चिमी प्रांत और यहां तक कि राजधानी तेहरान के अन्य स्कूलों ने भी इसी तरह के मामलों की खबर आई थी.
हिजाब को लेकर चल रहा है ईरान में प्रदर्शन – स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो अब तक देश भर के 30 से अधिक स्कूलों में 700 से अधिक छात्राएं ऐसी घटनाओं के शिकार हो चुकी हैं, ज्यादातर मामलों में छात्राओं को इलाज के तुरंत बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. बता दें कि ईरान में हिजाब को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज है, दुनिया भर से इस प्रदर्शन को समर्थन मिल रहा है. ऐसे समय में लड़कियों को जहर देने का मामला सामने आना हैरान करने वाला है.
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