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मिस्र के रेगिस्तान में दफन था 3000 साल पुराना ‘सोने का शहर’, पुरातत्वविदों ने खोज निकाला इसका छिपा हुआ खजाना, जानें


मिस्र के लाल सागर के गवर्नर के इलाके में पड़ने वाले मार्सा आलम के दक्षिण-पश्चिम में स्थित जबल सुकरी का स्थल 1000 ईसा पूर्व में औद्योगिक हलचल का केंद्र हुआ करता था। पुरातत्वविदों ने इस जगह को हाल के वर्षों में सबसे बड़ी पुरातात्विक खोजों में से एक कहा है।
मिस्र के जमीन दुनियाभर के पुरातत्वविदों को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। हजारों साल पुरानी सभ्यता का केंद्र रहा यह देश आज भी अपने अंदर अनगिनत रहस्य दफन किए हुए है। मिस्र की जमीन के अंदर दफन ऐसे ही एक रहस्य से पुरातत्वविदों ने पर्दा हटा दिया है। मिस्र में 3000 साल पुराने खो चुके सोने के शहर को खोज निकाला गया है। कई सालों की सावधानीपूर्वक खुदाई के बाद अब इसका पुनरुद्धार पूरा कर लिया गया है।
मिस्र के वैज्ञानिकों ने 2021 में इसकी खोज की थी, जिसे ‘खोया हुआ सुनहरा शहर’ कहा जाता है। मिस्र के लाल सागर के गवर्नरेट में मार्सा आलम के दक्षिण-पश्चिम में स्थित जबल सुकरी का स्थल 1000 ईसा पूर्व में औद्योगिक हलचल का केंद्र हुआ करता था। नवीनतम शोध इस बात की पुष्टि करता है कि इस स्थल ने सोने के खनन और उसकी प्रोसेसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसमें सोना निकालने के लिए संरचनाएं डिजाइन की गई थीं।
सोने की प्रोसेसिंग साइट – पुरातत्वविदों ने इस जगह को हाल के वर्षों में सबसे बड़ी पुरातात्विक खोजों में से एक कहा है। मिस्र की सुप्रीम काउंसिल ऑफ एंटिक्विटीज के महासचिव डॉ. मोहम्मद इस्माइल खालिद ने बताया कि खुदाई में सोने की प्रोसेसिंग साइट के अवशेष मिले हैं, जिसमें पीसने और कूटने के स्टेशन, फिल्टरेशन बेसिन और सोने को गलाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मिट्टी की भट्टियां शामिल हैं। ऑपरेशन के पैमाने से पता चलता है कि यह साइट मिस्र के प्राचीन सोने के व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी।
टॉलमी के काल के मिले सिक्के – साइट पर टॉलमी काल के सिक्के भी खोजे गए, जो बताते हैं कि यह साइट नए साम्राज्य के शुरुआती खनन कार्यों के बाद भी लंबे समय तक सक्रिय रही। मिस्र के पर्यटन और पुरावशेष मंत्री शेरिफ फथी ने कहा कि उत्खनन प्राचीन मिस्र के खनिकों की इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञता पर प्रकाश डालता है, जिन्होंने दुरूह रेगिस्तानी परिदृश्य में सोना निकालने के लिए परिष्कृत तरीके विकसित किए थे।
डॉ. खालिद ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पीसने और छानने वाले स्टेशनों के अवशेष प्रदर्शित करते हैं कि कैसे मिस्र के लोगों ने क्वार्ट्ज से सोना अलग करने की प्रक्रिया में महारत हासिल की। सोने को गलाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मिट्टी की भट्टियों की खोज इस बात की पुष्टि करती है कि यह स्थल न केवल एक खनन चौकी थी, बल्कि एक पूरी तरह से चालू प्रोसेसिंग साइट भी थी।