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अमेरिका तो गया पर अफगानिस्तान में ISIS को सबक सिखाना बाकी, कौन करेगा हमला?

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट-खोरसान (आईएसआईएस-के) से जुड़े कम से कम दो हजार लड़ाकों की मौजूदगी का खुलासा किया है। इसके बाद ब्रिटेन ने कहा है कि इस आतंकवादी संगठन के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए वह हमले करने के लिए ‘तैयार’ है। गौरतलब है कि इस्लामिक स्टेट के अफगानिस्तान में सहयोगी जिसे इस्लामिक स्टेट खोरसान कहा जाता है, ने काबुल स्थित हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गत बृहस्पतिवार को हुए दोहरे धमाके की जिम्मेदारी ली थी जिसमें 169 अफगान और 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।
ब्रिटेन के वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल सर माइक विगस्टन ने ‘ द डेली टेलीग्राफ’ अखबार से सोमवार को कहा कि ब्रिटेन इस्लामिक स्टेट-खोरसान के खिलाफ हमले में शामिल हो सकता है। वह अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिकों की वापसी पूरी होने के बाद बोल रहे थे।
करीब 20 साल बाद, अफगानिस्‍तान की कमान तालिबान के हाथ में आ चुकी है। लोग बस किसी तरह उस हुकूमत से बच निकलना चाहते हैं जिसने उन्‍हें आतंक के खौफनाक चेहरे से रूबरू कराया। अफगानी जनता उन दिनों को फिर से नहीं जीना चाहती। यही वजह है कि जब तालिबान का कब्‍जा बढ़ा तो जो निकल सकते थे, उन्‍होंने सामान बांधना शुरू कर दिया। पिछले कुछ दिनों से पलायन का दौर जारी है।
‘हम तैयार हैं’ : विगस्टन ने कहा, ‘ब्रिटेन दाएश (इस्लामिक स्टेट) द्वारा काबुल हवाई अड्डे पर किए गए हमले में मारे गए लोगों के शोक में अपने साझेदारों के साथ खड़ा है और कहीं भी दाएश का सामूहिक रूप से हर तरह से मुकाबला करने के लिए साथ है।’ उन्होंने कहा, ‘अगर हमारे के लिए योगदान करने का अवसर बनता है तो मुझे कोई संशय नहीं है कि हम उसके लिए तैयार हैं। चाहे कहीं भी हिंसक चरमपंथ का उदय होता है और ब्रिटेन और उसके सहयोगियों पर प्रत्यक्ष या परोक्ष खतरा उत्पन्न होता है तो हम तैयार हैं। अफगानिस्तान दुनिया के सबसे अगम्य स्थानों में से एक है।’
अखबार के मुताबिक ब्रिटिश सरकार के अधिकारी हवाई हमले के लिए रणनीतिक मदद की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं जिससे सवाल पैदा हो रहे हैं कि रॉयल एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों का ठिकाना कहां होगा और कैसे वे ईंधन भरेंगे और कैसे जमीन पर मौजूद लक्ष्य को चिह्नित करेंगे।