
लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल ऑन ने कहा कि मंगलवार को बेरूत में हुए भीषण विस्फोट को लेकर दो संभावनाएं जताई है। उन्होंने कहा कि इस धमाके को लेकर दो कारण हो सकते हैं। विस्फोट या तो लापरवाही के कारण हुआ हो सकता है या मिसाइल या बम द्वारा बाहरी हस्तक्षेप की वजह से हुआ है। ऑन ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने फ्रांस से कहा कि वह उपग्रह की तस्वीरों से यह देखे कि क्या विस्फोट के समय आसमान में कोई जंगी विमान या मिसाइल थी।
माना जाता है कि बंदरगाह में आग लगने की वजह से वहां रखे 2750 टन एमोनियम नाइट्रेट में विस्फोट हो गया। इस विस्फोटक सामग्री को 2013 में एक पोत से जब्त से किया गया था और यह तभी से यहीं पड़ी हुई थी। आग लगने के कारण का पता नहीं चला है। उन्होंने कहा कि जांच 20 व्यक्तियों पर केंद्रित है। उन्होंने विस्फोट की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग को खारिज करते हुए कहा कि इससे सच सामने नहीं आएगा।
20 जुलाई को सरकार को मिली थी सूचना
ऑन ने पत्रकारों को बताया कि उन्हें 20 जुलाई को सूचना मिली थी कि बंदरगाह पर बड़ी मात्रा में रसायन रखा है और उन्होंने सेना और सुरक्षा अधिकारियों को तत्काल जरूरी कदम उठाने का आदेश दिया। उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि 2013 से कई सरकारी प्रभारियों को सामग्री के बारे में चेतावनियां मिली हैं।
तीन दिन बाद भी तलाशे जा रहे शव
भीषण विस्फोट के तीन दिन बाद भी बचावकर्ताओं के दल शवों की तलाश के लिए शुक्रवार को मलबा खंगालते रहे। इस घटना में तकरीबन 150 लोगों की जान चली गई है और हजारों जख्मी हो गए हैं तथा शहर में बड़े पैमाने पर तबाही मची है। अधिकारियों के मुताबिक, बीते 24 घंटे में कम से कम तीन शव बरामद किए गए, जिसके बाद मृतकों की संख्या 149 हो गई।
संयुक्त राष्ट्र ने स्वतंत्र जांच कराने की अपील की
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने मामले की स्वतंत्र जांच कराने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र मानाधिकार उच्चायुक्त के प्रवक्ता रूपर्ट कॉलविले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लेबनान की मदद के लिये आगे आने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि लेबनान सामाजिक-आर्थिक संकट, कोविड-19 और अमोनियम नाइट्रेट धमाके समेत तीन त्रासदियों का सामना कर रहा है। उन्होंने इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की अपील की है।
बेरूत में तीन लाख लोग बेघर
बेरूत के करीब तीन लाख लोग अपने घर नहीं लौट पा रहे हैं, क्योंकि विस्फोट के कारण उनके घरों के दरवाजे-खिड़कियां उड़ गईं। कई इमारतें रहने लायक नहीं हैं। अधिकारियों ने 10 से 15 अरब अमेरिकी डॉलर के नुकसान का अंदाजा लगाया है। अस्पताल पहले से ही कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहे थे। वे अब घायलों ने निपटने में संघर्ष कर रहे हैं। जांच बंदरगाह तथा सीमा शुल्क विभाग पर केंद्रित है। 16 कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है तथा अन्य से पूछताछ की गई है।
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