
ब्रिटेन में एक भारतवंशी एक महिला ने अपने एक छोटे से कदम से नए प्रधानमंत्री की नींव हिला कर रख दी है। संसद को निलंबित करने के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के फैसले के खिलाफ भारतीय मूल की ब्रेक्जिट विरोधी प्रचारक जीना मिलर ने न्यायिक समीक्षा याचिका दायर की है। जीना ने इससे पहले प्रधानमंत्री थरेसा मे सरकार की संसद की राय लिए बगैर ब्रेक्जिट प्रस्ताव की स्वीकृति की प्रक्रिया के विरोध में भी याचिका दायर की थी। इसमें उन्हें सफलता मिली थी और थरेसा सरकार संसद में ब्रेक्जिट प्रस्ताव लेकर आई थी, हालांकि वह प्रस्ताव वहां गिर गया था।
जीना मिलर ने कहा कि 14 अक्टूबर तक संसद को निलंबित रखने का प्रधानमंत्री का फैसला उनकी कायरता की निशानी है। यूरोपीय यूनियन छोड़ने की तारीख 31 अक्टूबर से पहले सांसदों को इस मसले पर चर्चा का समय दिया जाना चाहिए। सरकार के फैसले के खिलाफ जीना की ऑनलाइन याचिका को कुछ ही घंटों के भीतर दस लाख से ज्यादा लोगों का समर्थन मिल गया, जो किसी याचिका पर विचार के लिए पर्याप्त संख्या है। जीना ने कहा है कि सही सोच वाले ब्रिटिश नागरिक, जो कानून के राज में विश्वास रखते हैं और दुनिया में ब्रिटेन का सम्मान और लोकतांत्रिक परंपराएं बनाए रखना चाहते हैं, वे सरकार के फैसले के विरोध में उनकी याचिका का समर्थन करें।
जीना मिलर ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह 9 सितंबर से पहले उनकी याचिका पर सुनवाई कर फैसला सुनाए। इससे निर्धारित समयानुसार 9 सितंबर, 2019 से संसद सत्र शुरू हो सकेगा और तब सरकार को ब्रेक्जिट का मसौदा संसद के समक्ष रखना होगा। विरोधियों से सरकार को भी खतरा ऐसा नहीं कि संसद को निलंबित कर प्रधानमंत्री जॉनसन ने ब्रेक्जिट का मैदान मार लिया है। विरोधी भी हार नहीं मान रहे।
हाउस ऑफ कॉमंस में सत्ता पक्ष के ब्रेक्जिट समर्थक नेता जैकब रीस मॉग ने कहा है कि हमारे पास दो विकल्प हैं। हम सरकार बदल सकते हैं या कानून बदल सकते हैं। यह कार्य 31 अक्टूबर से पहले या उसके बाद भी हो सकता है। जैकब सत्ता पक्ष में हैं ेलेकिन ब्रेक्जिट को लेकर सरकार की रणनीति के खिलाफ हैं।
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