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सिंधु संधि पर आर्बिट्रेशन कोर्ट के फैसले से खुश हुए बिलावल, बोले- पाकिस्तान की बात को दुनिया ने माना


सिंधु जल संधि पर नीदरलैंड्स के द हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (पीसीए) के फैसले के बाद बिलावल भुट्टो ने भारत को घेरने की कोशिश की है। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो का कहना है कि दुनिया के सामने ये साबित हुआ है कि हमारा पक्ष इस मामले में जायज है। अब भारत को भी संधि बहाल करनी चाहिए। बिलावल भुट्टो का बयान भारत के सिंधु संधि पर पीसीए के फैसले को खारिज करने के बाद आया है। वह लगातार इस मुद्दे पर बोलते रहे हैं और भारत को युद्ध की गीदड़भभकी तक दे चुके हैं।
बिलावल भुट्टों ने एक्स पर अपने पोस्ट में कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय कानून ने स्पष्ट और सर्वसम्मति से अपनी बात कही है। यह माना गया है कि IWT (सिंधु जल संधि) लागू है। कोई भी देश (भारत) एकतरफा तौर पर किसी बाध्यकारी संधि को खारिज नहीं कर सकता है और ना ही लाखों लोगों के खिलाफ पानी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय कानून ने बहुत साफ-साफ ये मान लिया है कि सिंधु जल संधि पहले की तरह आज भी लागू है। इसे एकतरफा तरीके से खत्म नहीं किया जा सकता है। ये साबित हुआ है कि पानी कोई हथियार नहीं है। सिंधु बहेगी और कानून की ही जीत होगी।
भारत करे संधि का सम्मान: भुट्टो – पूर्व पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने आगे लिखा, ‘मैंने पहले भी कई बार कहा है कि सिंधु नदी एक राष्ट्र की जीवन-रेखा है। नदियां दबाव डालने का जरिया नहीं बन सकतीं हैं। पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय कानून के साथ खड़ा रहा और अंतर्राष्ट्रीय कानून ने पाकिस्तान का पक्ष सही साबित किया। भारत को फैसले और संधि का सम्मान करना चाहिए।’
पाकिस्तान और भारत के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में साल 1960 में सिंधु जल संधिहुई थी। इसमें सिंधु नदी घटी की छह नदियों में से तीन पूर्वी नदियां भारत को और तीन पश्चिमी नदियां पाकिस्तान को मिलीं। अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित कर दिया। इसके बाद से पाकिस्तान इस मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालतों और मंचों से उठा रहा है।
परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का फैसला – नीदरलैंड्स के द हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (पीसीए) ने कहा है कि भारत को पाकिस्तान के साथ जल बंटवारे की संधि का पालन करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सिंधु जल संधि पूरी तरह प्रभावी है और भारत के पास इसे समाप्त या निलंबित करने का कोई औचित्य नहीं था। अदालत ने यह भी कहा कि भारत को जम्मू-कश्मीर में बनाए जा रहे एक पनबिजली संयंत्र पर अपने काम को सीमित करना चाहिए।
हेग स्थित कोर्ट के फैसले से पाकिस्तान खुश है, वहीं भारत ने साफ किया है कि वह इस फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं है। यानी संधि को निलंबित करने का फैसला जारी रहेगा। पीसीए एक इंटरगवर्नमेंटल संगठन है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वैकल्पिक विवाद समाधान सेवाएं देता है। पीसीए के नियमों का इस्तेमाल मध्यस्थता और सुलह की कार्यवाहियों के साथ-साथ जांच आयोगों में किया जा सकता है।