
चीन ने 1 मई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के अध्यक्ष देश का कार्यभार संभाला है। यूएनएससी दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों का समूह है। ऐसे में यूएनएससी का अध्यक्ष बनते ही चीन ने अपने एजेंडे पर काम शुरू कर दिया है। उसने पहले ही दिन लेबनान से संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की वापसी का विरोध किया। इन शांति सैनिकों की तैनाती यूएनएससी के फैसले के बाद हुई है। यूएन स्थित स्थाई चीनी प्रतिनिधि फू छोंग ने उसी दिन आयोजित न्यूज ब्रीफिंग में कहा कि सुरक्षा परिषद इस महीने तीन प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगी। पहला, संयुक्त राष्ट्र चार्टर की प्रतिष्ठा और यूएन की भूमिका का पुनरोत्थान करना। दूसरा, मध्य-पूर्व मुद्दे का राजनीतिक समाधान बढ़ाना और तीसरा, अफ्रीकी देशों की स्थिरता और विकास का समर्थन करना।
फू छोंग ने कहा कि हाल के वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय स्थिति में उथल-पुथल तेज हो रहा है। मुठभेड़ व मुकाबला बढ़ रहे हैं और बहुपक्षीय व्यवस्था व अंतरराष्ट्रीय कानून पर गंभीर नुकसान पहुंचा। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को संयुक्त राष्ट्र चार्टर की प्रतिष्ठा और यूएन की भूमिका बढ़ाने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है। सुरक्षा परिषद मई में इस विषय पर उच्च स्तरीय खुली बहल आयोजित करेगी। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल मिशन दोहराते हुए द्वितीय विश्व युद्ध की उपलब्धियों की रक्षा करना है और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में यूएन की केंद्रीय भूमिका का पुनरोत्थान करना है।
चीन ने दुनियाभर के संघर्षों का नाम गिनाया – फू छोंग ने कहा कि मई में सुरक्षा परिषद इजरायल-फिलिस्तीन, लेबनान और सीरिया सहित विभिन्न मुद्दों की नियमित समीक्षा करेगी। इसके अलावा, चीन सुरक्षा परिषद से अफ्रीका पर ध्यान केंद्रित रखने का आग्रह करेगा। फू छोंग ने यह भी कहा कि यूएन एक नाजुक मोड़ पर है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को एक शक्तिशाली महासचिव की ज़रूरत है, जो बहुपक्षवाद के प्रति और यूएन की भूमिका बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।
लेबनान से शांति सेना की वापसी पर भड़का चीन – संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत फू कोंग ने कहा है कि लेबनान में लंबे समय से चल रहे शांतिरक्षा मिशन के जनादेश को समाप्त करने के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के निर्णय पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है, जो इस साल के अंत में समाप्त होने वाला है। शुक्रवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए, राजदूत फू ने लेबनान की स्थिति के बारे में चीन की गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लेबनान में वास्तविक युद्धविराम मौजूद नहीं है, और मौजूदा संघर्ष की स्थिति को उन्होंने महज एक “मामूली आग” बताया। चीनी दूत ने कहा, “हमारा मानना है कि हमें वास्तव में यूएनआईएफआईएल को वापस बुलाने के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।”
UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का क्या होगा – चीन मई महीने में यूएनएससी का अध्यक्ष है। इसके अलावा उसके पास वीटो शक्ति भी है। ऐसे में जब तक चीन की रजामंदी नहीं होगी, भारत यूएनएससी का स्थायी सदस्य नहीं बन सकता है। हालांकि, चीन ने ऐसा संकेत दिया है कि वह भारत की स्थायी सदस्यता का विरोध नहीं करेगा, लेकिन हो सकता है कि नए सदस्य देशों को पुराने स्थायी सदस्यों जितनी शक्ति न मिले। हालांकि, भारत ने यूएनएससी के नए सदस्य देशों को वीटो पावर न देने के प्रस्ताव का विरोध किया है।
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