
भारत और अमेरिका से तनाव के बीच चीन लगातार अपनी सेना को मजबूत कर रहा है। चीनी मीडिया ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पीएलए नेवी का दूसरे एयरक्राफ्ट कैरियर शेडोंग ने हाल में ही यलो सी में एक पनडुब्बी के साथ युद्धाभ्यास किया है। इस दौरान एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात J-15 लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरकर दुश्मनों के ठिकानों पर बमबारी की। एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ युद्धाभ्यास में शामिल पनडुब्बी ने पानी के भीतर दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाया।
फाइटर जेट्स ने टेकऑफ और लैंडिंग का किया अभ्यास : चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 23 दिनों तक चले इस युद्धाभ्यास के दौरान इस एयरक्राफ्ट कैरियर से बड़ी संख्या में फाइटर जेट्स ने टेकऑफ और लैंडिंग का अभ्यास किया। युद्धाभ्यास खत्म होने के बाद शैंडोंग एयरक्राफ्ट कैरियर इस साल की अपनी तीसरी समुद्री यात्रा को खत्म कर चीन के लियाओनिंग प्रांत में स्थित डालियान शिपयार्ड में लौट आया है।
21 नवंबर को युद्धाभ्यास के लिए रवाना हुआ था शैंडोंग : चीन सेंट्रल टेलीविजन (सीसीटीवी) की रिपोर्ट के अनुसार, शेडोंग ने 21 नवंबर को शिपयॉर्ड को छोड़कर यलो सी में ट्रेनिंग के लिए रवाना हुआ था। 6 दिसंबर को यह एयरक्राफ्ट कैरियर बोहाई सागर में देखा गया था। इस ट्रेनिंग के दौरान एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ इसकी फ्लीट नहीं थी। बता दें कि किसी भी एयरक्राफ्ट कैरियर के मिशन में क्रूजर, डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, अटैक पनडुब्बियां शामिल होती हैं।
तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की लॉन्चिंग में जुटा चीन : चीन अपने तीसरे अडवांस एयरक्राफ्ट कैरियर को लॉन्च करने की तैयारियों में जुटा है। टाइप 002 क्लास का यह एयरक्राफ्ट कैरियर चीन का अपनी तरह का तीसरा जंगी जहाज होगा। इस एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया है। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने डिफेंस मैगजीन ऑर्डनेंस इंडस्ट्री साइंस टेक्नोलॉजी के हवाले से बताया है कि इसे 2020 के अंत या 2021 की शुरुआत में लॉन्च किया जा सकता है।
2018 में शुरू हुआ था प्रोजक्ट : साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, टाइप 002 श्रेणी के इस विमानवाहक पोत को बनाने का काम 2018 में ही शुरू हो गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे पिछले साल रोक दिया गया था। बताया जा रहा है कि इन एयरक्राफ्ट कैरियर्स का निर्माण तेजी से हो रहा है, क्योंकि इससे पहने बनाए गए स्वदेशी विमानवाहक पोत के निर्माण से श्रमिकों ने बहुत कुछ सीखा है। इसे शंघाई के बाहर जियांगन शिपयार्ड में बनाया जा रहा है।
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