
इस पर्वतीय श्रृंखला को लेकर क्षेत्रीय विवाद एक शताब्दी से भी अधिक पुराना है। लेकिन हालिया दशकों में चीन ने द्वीप समूह के आसपास अपनी उपस्थिति को बढ़ा दिया है। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि बीजिंग फिर विवादित द्वीपों पर अपना दावा करेगा।
विवादित द्वीप को लेकर चीन और जापान के बीच तनाव : टोक्यो : जापान के मछुआरे ज्यादातर मछली पकड़ने के लिए जापानी द्वीप योनागुनी से दूर उत्तर की ओर गहरे समुद्र में जाते हैं। यहां इन्हें रेड स्नैपर मिलती है जो गहरे पानी में पाई जाती है। यहां मछलियां बहुत अधिक मात्रा में हैं और लगातार बढ़ रही हैं। मछलियों के साथ-साथ द्वीप के पास चीनी तट रक्षक जहाज भी बढ़ रहे हैं। जापान के नियंत्रण वाले सेनकाकू द्वीप समूह के आसपास चीनी जहाजों की गश्त बढ़ गई है।
सेनकाकू निर्जन द्वीपों की एक श्रृंखला है जिस पर चीन और ताइवान भी अपना दावा करते हैं। चीन में इसे दिआओयु द्वीप समूह और ताइवान में दिआओयुताई कहते हैं। यह द्वीप समूह क्षेत्र में बढ़ते तनाव का प्रमुख केंद्र बन चुका है। सीएनएन से बात करते हुए 50 साल के मछुआरे कज़ुशी किनजो ने चीनी तट रक्षक जहाजों के साथ अपने अनुभव को याद करते हुए कहा कि उनमें से एक जहाज का निशाना हमारी तरफ था और वे हमारा पीछा कर रहे थे। मैं पक्के तौर पर तो नहीं जानता लेकिन मैंने तोपों जैसा कुछ देखा था।
चीनी और जापान कर रहे द्वीपों पर अपना दावा : पर्वतीय श्रृंखला को लेकर क्षेत्रीय विवाद एक शताब्दी से भी अधिक पुराना है। लेकिन हालिया दशकों में चीन ने द्वीप समूह के आसपास अपनी उपस्थिति को बढ़ा दिया है। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि बीजिंग विवादित द्वीपों पर एकबार फिर अपना दावा करेगा। चीन के विदेश मंत्रालय ने सीएनएन को बताया कि द्वीपों के आसपास समुद्र में चीनी तटरक्षक बलों की गश्त ‘चीन के संप्रभु अधिकार का एक हिस्सा’ थी। वहीं जापान का दावा है कि इन द्वीपों पर उसका संप्रभु अधिकार है।
खौफ में जापान और ताइवान के मछुआरे : जापान योनागुनी और नानसेई श्रृंखलाओं पर अपनी सैन्य ताकतों को बढ़ा रहा है। इससे किनजो जैसे स्थानीय नागरिक चिंतित हैं क्योंकि उन्हें चीन के इरादे पता हैं। ये द्वीप ताइपान के तट से सिर्फ 110 किमी की दूरी पर स्थित हैं। ताइवान पहले से ही चीन की तरफ से गंभीर सैन्य तनाव का सामना कर रहा है। अब उसे डर सता रहा है कि द्वीपों पर बढ़ता तनाव उसके देश के शांतिपूर्ण समुदाय को प्रभावित कर सकता है। खासकर अगर चीन उनके मछली पकड़ने के क्षेत्र तक पहुंच को प्रतिबंधित करता है जो ताइवान की अजीविका में प्रमुख भूमिका निभाता है।
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